पिछले कुछ समय से देश के कई शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक होता जा रहा है। धूल, धुआं और ज़हरीले कणों से भरी हवा लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर गहरा असर डाल रही है। सांस की परेशानी, आंखों में जलन और थकान जैसे लक्षण तो पहले से दिखाई दे रहे थे, लेकिन अब इसका असर खाने-पीने की आदतों पर भी तेजी से दिखने लगा है। डॉक्टर मानते हैं कि खराब हवा शरीर के अंदर की प्रक्रियाओं को दिक्कत में डालकर भूख, स्वाद और पाचन क्षमता तीनों पर असर डालती है।
प्रदूषण कैसे बदल देता है स्वाद और भूख?
प्रदूषण के बढ़े स्तर का सबसे सीधा प्रभाव स्वाद और गंध की क्षमता पर पड़ता है। डॉक्टर उषस्त धीर बताते हैं कि हवा में मौजूद PM2.5, धुआं और रसायन नाक और गले में सूजन पैदा कर देते हैं। जब सूंघने की क्षमता कमजोर होती है तो भोजन की सुगंध कम महसूस होती है। यही वजह है कि पहले जैसा स्वाद भी महसूस नहीं होता। कई लोग बताते हैं कि पेट खाली होने के बावजूद खाने का मन नहीं करता और एनर्जी तेजी से गिरने लगती है। इससे शरीर थका हुआ, चिड़चिड़ा और कमजोर महसूस करता है।
पाचन तंत्र पर प्रदूषण का भारी बोझ
प्रदूषित हवा केवल सांसों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि धीरे-धीरे पाचन तंत्र पर भी गहरा असर डालती है। हवा में मौजूद हानिकारक तत्व पेट और आंतों में सूजन बढ़ाते हैं, जिससे पाचन प्रक्रिया धीमी पड़ने लगती है। नतीजतन भूख घट जाती है और भोजन करने के बाद भारीपन या गैस जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। लंबे समय तक ऐसा बने रहने पर शरीर में पोषक तत्वों की कमी और लगातार थकान की समस्या भी पैदा हो सकती है।
क्यों बढ़ती है नॉज़िया और मिचली की शिकायत
प्रदूषण में मौजूद बारीक कण शरीर में जमा होकर दिमाग को उल्टी या भारीपन का संकेत भेजते हैं। इसी वजह से कई लोगों में प्रदूषण वाले दिनों में नॉज़िया या मिचली की समस्या बढ़ जाती है, खासकर सुबह के समय या बाहर कहीं से घर लौटने के बाद। यह शरीर की ओर से दिया गया संकेत है कि वह प्रदूषित वातावरण से खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन लगातार ऐसे कणों के संपर्क में आने से असहजता बढ़ती जाती है।
गट माइक्रोबायोम पर प्रदूषण का गहरा असर
शरीर के पाचन और इम्यून सिस्टम को नियंत्रित करने वाले अच्छे बैक्टीरिया यानी गट माइक्रोबायोम पर भी प्रदूषण का गंभीर असर होता है। धुआं और रसायन आंतों में जाकर इन अच्छे बैक्टीरिया की संख्या घटा देते हैं, जिससे गट डिस्बायोसिस की स्थिति बनती है। इससे पाचन कमजोर होता है, भूख कम होती है और पेट बार-बार भारी महसूस होता है। चूंकि गट और दिमाग का सीधा संबंध है, इसलिए यह असंतुलन मूड और एनर्जी पर भी असर डालता है।
कैसे रखें खुद को सुरक्षित?
प्रदूषण से बचाव के लिए बाहर निकलते समय N95 मास्क पहनना सबसे ज़रूरी है। घर की हवा को साफ रखने के लिए वेंटिलेशन और सफाई का ध्यान रखना चाहिए। दही, फल, फाइबर और पर्याप्त पानी का सेवन गट स्वास्थ्य को सुधारता है। हल्दी, अदरक और विटामिन सी जैसे तत्व शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर प्रदूषण के दुष्प्रभाव कम करने में मदद करते हैं।