Indigo Crisis ने बढ़ाईं BCCI की मुश्किलें, SMAT के नॉकआउट मैच इंदौर से पुणे शिफ्ट, अब इन मैदानों पर होंगे मैच

इंडिगो फ्लाइट्स में जारी भारी अव्यवस्था का प्रभाव अब पूरे देश में महसूस किया जा रहा है। हजारों उड़ानें रद्द होने और एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की भीड़ ने कई सेक्टरों को प्रभावित किया है। इसी संकट की चपेट में अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) भी आ गया है। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के नॉकआउट मैचों का आयोजन इंदौर में होना था, लेकिन इंडिगो संकट और यात्रा संबंधी दिक्कतों के कारण बीसीसीआई को मजबूर होकर पूरा वेन्यू बदलना पड़ा। पहले ये मुकाबले होल्कर क्रिकेट स्टेडियम और एमराल्ड हाई स्कूल ग्राउंड में खेले जाने थे, लेकिन अब इन्हें पूरी तरह पुणे में शिफ्ट कर दिया गया है।

इंदौर से पुणे शिफ्ट हुए सभी नॉकआउट मुकाबले

सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के आखिरी 12 मुकाबले, सुपर लीग और फाइनल मैच 12 से 18 दिसंबर के बीच इंदौर में खेले जाने थे। लेकिन इंडिगो फ्लाइट संकट के चलते यात्रा व्यवस्था बिगड़ने के साथ-साथ शहर में 9 से 12 दिसंबर तक डॉक्टरों का वर्ल्ड सम्मेलन भी आयोजित हो रहा है। इस कारण इंदौर में होटल रूम उपलब्ध नहीं हैं। मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (MPCA) के सीईओ रोहित पंडित ने इस स्थिति की जानकारी बीसीसीआई को पहले ही दे दी थी। इसी के बाद बीसीसीआई ने सभी नॉकआउट मुकाबलों को पुणे स्थानांतरित करने का फैसला किया।

पुणे के दो स्टेडियम में होगी मेजबानी

अब SMAT के नॉकआउट मुकाबले पुणे के एमसीए स्टेडियम और डीवाई पाटिल अकादमी में खेले जाएंगे। बीसीसीआई के इस बदलाव से टीमों, सपोर्ट स्टाफ और अधिकारियों को नई यात्रा योजनाएं बनानी होंगी। हालांकि, वेन्यू की उपलब्धता और यात्रा में सुविधा को ध्यान में रखते हुए पुणे को इस आयोजन के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है।

BCCI के सामने बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती

वेन्यू बदलने के बाद बीसीसीआई को अब लॉजिस्टिक स्तर पर कई मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। बोर्ड को अहमदाबाद, कोलकाता, लखनऊ और हैदराबाद जैसे चार ग्रुप-स्टेज वेन्यू से खिलाड़ियों, कोचों, अंपायरों और अधिकारियों को पुणे भेजना होगा। इसके साथ-साथ देश में अन्य घरेलू टूर्नामेंट भी एक साथ चल रहे हैं। अहमदाबाद में महिला अंडर-23 टी20 ट्रॉफी और पुरुष अंडर-19 कूच बिहार ट्रॉफी भी जारी है, जिनके लिए भी टीमों और अधिकारियों की लगातार यात्रा आवश्यक है। यदि इंडिगो संकट ऐसे ही जारी रहा तो आठ टीमों के साथ अंपायरों और अन्य अधिकारियों को समय पर पुणे पहुंचाना बीसीसीआई के लिए और अधिक कठिन हो सकता है।

संकट से उबरने की चुनौती

अब देखने वाली बात यह होगी कि दुनिया के सबसे संपन्न क्रिकेट बोर्डों में से एक बीसीसीआई इस यात्रा संकट का समाधान कैसे करता है। मौजूदा हालात में बीसीसीआई को कम समय में सुरक्षित, सुविधाजनक और तय कार्यक्रम के अनुरूप सभी टीमों को शिफ्ट करना होगा। आने वाले दिनों में यह फैसला भारतीय घरेलू क्रिकेट की सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।

Rishabh Chhabra
Author: Rishabh Chhabra