Banana और Avocado भी बढ़ा सकते हैं माइग्रेन, जानें क्यों होता है ऐसा

माइग्रेन एक जटिल न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जो केवल तनाव या मौसम ही नहीं, बल्कि हमारी डाइट से भी प्रभावित हो सकती है। हैरानी की बात यह है कि कई बार केले और एवोकाडो जैसे बेहद पौष्टिक फल भी माइग्रेन को बढ़ा सकते हैं। आमतौर पर ये फल विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और हेल्दी फैट से भरपूर माने जाते हैं, लेकिन इनमें मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व संवेदनशील लोगों में माइग्रेन की प्रक्रिया को सक्रिय कर सकते हैं। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को बार-बार तीव्र सिरदर्द होता है, तो यह जानना जरूरी है कि उसकी खाने की आदतें भी इस समस्या को ट्रिगर कर सकती हैं।

केले और एवोकाडो के पोषण लाभ

केला शरीर के लिए बेहद उपयोगी फल है। इसमें पोटैशियम, विटामिन B6, मैग्नीशियम और नेचुरल शुगर की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर को तुरंत और स्थिर ऊर्जा प्रदान करती है। पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है, जबकि विटामिन B6 दिमाग और मेटाबॉलिज़्म के लिए जरूरी है। मैग्नीशियम मांसपेशियों और नसों को आराम देता है, जिससे थकान और कमजोरी जल्दी दूर होती है। यही कारण है कि बीमारी या कमजोरी के बाद केला इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस सुधारने में मददगार माना जाता है। दूसरी तरफ एवोकाडो हेल्दी फैट, फाइबर, पोटैशियम, फोलेट और कई एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर है। ये सभी तत्व दिल के लिए अच्छे होते हैं, दिमाग के कामकाज को बेहतर बनाते हैं और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। एवोकाडो में मौजूद विटामिन E और ल्यूटिन त्वचा की सेहत और सूजन नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

केला और एवोकाडो माइग्रेन क्यों बढ़ाते हैं?

हालांकि पोषण के लिहाज से दोनों फल बेहद फायदेमंद हैं, लेकिन इनमें टायरामिन नाम का प्राकृतिक कंपाउंड पाया जाता है। टायरामिन शरीर में प्रोटीन के टूटने पर बनता है और यह ब्लड वेसल्स के फैलाव और न्यूरोट्रांसमीटर रिलीज पर असर डालता है। यही कारण है कि यह माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है। जितना अधिक फल पकता है, उसमें टायरामिन की मात्रा उतनी बढ़ जाती है। बहुत पके केले और एवोकाडो माइग्रेन वाले लोगों के लिए समस्या पैदा कर सकते हैं। एवोकाडो में कुछ मात्रा में हिस्टामीन और पॉलीफेनॉल भी होते हैं, जो दिमाग की संवेदनशील नसों को उत्तेजित कर सकते हैं।

टायरामिन का माइग्रेन पर असर

कई शोध बताते हैं कि टायरामिन वाले खाद्य पदार्थ माइग्रेन के प्रमुख ट्रिगर हो सकते हैं। यह कंपाउंड शरीर के सिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है, जिससे रक्त प्रवाह और ब्लड प्रेशर में बदलाव आते हैं। यह प्रक्रिया माइग्रेन की शुरुआत को तेज कर सकती है और दर्द को अधिक तीव्र बना सकती है। यही कारण है कि माइग्रेन से जूझ रहे लोगों में टायरामिन की सहनशक्ति अलग-अलग होती है।

किसे और कैसे बरतनी चाहिए सावधानी

जो लोग माइग्रेन के मरीज हैं, उन्हें बहुत पके हुए केले और एवोकाडो से बचना चाहिए। साथ ही खाने की डायरी बनाकर यह नोट करना फायदेमंद होता है कि कौन-सा भोजन सिरदर्द ट्रिगर करता है। मात्रा नियंत्रित रखना भी जरूरी है, क्योंकि कम मात्रा में ये फल कई बार परेशानी नहीं पैदा करते। सही संतुलन के साथ इनके पोषक लाभ लिए जा सकते हैं, बशर्ते शरीर की प्रतिक्रिया को समझकर सेवन किया जाए।

Rishabh Chhabra
Author: Rishabh Chhabra