दिल्ली ब्लास्ट केस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कई चौंकाने वाली परतें सामने आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, डॉ. उमर जहां ISIS के ‘दाएश’ मॉड्यूल से प्रभावित था, वहीं उसके बाकी साथी अल-कायदा की विचारधारा को मानते थे। इस विचारधारा के फर्क की वजह से उनके बीच अक्सर टकराव हो जाता था। फंडिंग को लेकर भी समूह के भीतर मनमुटाव था। हवाला से करीब 20 लाख रुपये और जमात से 40 लाख रुपये मिले थे, लेकिन इन पैसों के इस्तेमाल पर लगातार बहस चलती रहती थी।
काजीगुंड से वापसी और बुरहान वानी से जुड़ाव
सूत्रों के अनुसार, अक्टूबर में डॉ. उमर आंतरिक विवाद सुलझाने काजीगुंड गया था, लेकिन साथियों की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही वह तुरंत लौट आया। जांच में यह भी सामने आया है कि वह बुरहान वानी की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों में शामिल हुआ था और उसकी मौत का बदला लेने की बात करता था। आर्टिकल 370 हटने के बाद से वह बेहद नाराज था और इससे उसकी कट्टरता और बढ़ गई।
IED रिसर्च में गहराई
जांच एजेंसियों का मानना है कि 2023 से डॉ. उमर IED डिवाइसेज से जुड़े रिसर्च में लगा हुआ था। वह डॉ. आदील अहमद राठर और डॉ. मुजम्मिल को भी इसी दिशा में गाइड कर रहा था। इसके अलावा वह जैश-ए-मोहम्मद की बैठकों में दी जाने वाली भारत-विरोधी स्पीच सुनता था और उनसे प्रभावित होता गया।
10 नवंबर का भीषण ब्लास्ट
10 नवंबर को लाल किले के पास एक कार में धमाका हुआ था, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए। इस हादसे ने पूरे देश को हिला दिया। जांच एजेंसियां लगातार नई जानकारियों को जोड़कर इस साजिश की गहराई तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
सूटकेस बना खतरनाक रहस्य
पूछताछ में डॉ. मुजम्मिल ने खुलासा किया कि डॉ. उमर का एक सूटकेस उसका सबसे बड़ा राजदार था। सुरक्षा एजेंसियों ने जब यह सूटकेस खोला तो इसमें बम बनाने का काफी सामान मिला। मुजम्मिल ने बताया कि वह, डॉ. उमर, डॉ. अदील और मुफ्ती इरफान मिलकर बड़ी आतंकी योजना तैयार कर रहे थे। इस ग्रुप का मुखिया खुद डॉ. उमर था।
चीनी भाषा में चलता था गुप्त ग्रुप
मुजम्मिल ने बताया कि उन्होंने एक विशेष ग्रुप बनाया था, जिसका एडमिन उमर था। यह ग्रुप चीनी भाषा में बनाया गया था और बातचीत भी उसी भाषा में की जाती थी, ताकि सुरक्षा एजेंसियों को भनक न लगे। डॉ. आदील पहले से उमर को जानता था क्योंकि वह उसका जूनियर था।
2022 में हुई पहली मुलाकात
सूत्र बताते हैं कि चारों उमर, मुजम्मिल, इरफान और आदील की पहली मुलाकात फरवरी 2022 में श्रीनगर में हुई थी। इसी मुलाकात के बाद उनके गुप्त बैठकों का सिलसिला शुरू हुआ। उसी साल तुफैल नाम के व्यक्ति के जरिए AK-47 राइफल भी मंगवाई गई थी, जो इस साजिश की गंभीरता को और पुख्ता करती है।