सनातन धर्म में विवाह पंचमी का पर्व अत्यंत शुभ माना जाता है और यह भगवान श्रीराम एवं माता सीता के दिव्य विवाह की स्मृति में मनाया जाता है। मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पावन उत्सव भक्तों को दांपत्य जीवन में प्रेम, सौहार्द और स्थिरता पाने का अवसर देता है। विवाह की इच्छा रखने वाले तथा वैवाहिक जीवन में समस्याओं से जूझ रहे दंपत्तियों के लिए यह दिन विशेष रूप से कल्याणकारी माना गया है।
राम–सीता विवाह का प्रतीकात्मक आयोजन
विवाह पंचमी पर राम और सीता का प्रतीकात्मक विवाह करवाना सबसे प्रभावशाली उपाय माना गया है। घर के मंदिर में या किसी पूजा स्थल पर भगवान राम और माता सीता की प्रतिमाएं स्थापित कर उनका विधिपूर्वक पूजन किया जाता है। लाल या पीले वस्त्र से दोनों की प्रतिमाओं का गठबंधन बांधना दांपत्य जीवन में मजबूती और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इस पूजा से पति–पत्नी के संबंधों में अटूट विश्वास और सौहार्द का संचार होता है।
रामचरितमानस के पाठ का पुण्य
विवाह पंचमी का सीधा संबंध रामचरितमानस की रचना से भी माना जाता है। इसी तिथि पर तुलसीदास जी ने मानस को पूर्ण किया था। इसलिए इस दिन पति–पत्नी द्वारा साथ बैठकर रामचरितमानस या कम से कम सुंदरकांड का पाठ करना विशेष असरदार होता है। इसका सकारात्मक प्रभाव घर में शांति, सामंजस्य और मानसिक संतुलन लाता है। वैवाहिक जीवन में चल रही तनावपूर्ण परिस्थितियाँ भी कम होने लगती हैं।
माता सीता को सुहाग सामग्री अर्पित करना
माता सीता को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। विवाह पंचमी के दिन उन्हें लाल साड़ी, चूड़ियां, मेहंदी, सिंदूर और श्रृंगार सामग्री अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है। यह उपाय दांपत्य जीवन में मिठास, सम्मान और आपसी समझ बढ़ाने वाला माना गया है। इसका प्रभाव पति–पत्नी के बीच चल रहे किसी भी मनमुटाव को दूर करने में मदद करता है और संबंध फिर से मधुर होने लगते हैं।
तुलसी और कछुए के उपाय
रामा तुलसी का पौधा विवाह पंचमी पर घर में स्थापित करना वैवाहिक जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है। प्रतिदिन तुलसी की पूजा करने से दांपत्य कलह और तनाव कम होते हैं। वहीं धातु या क्रिस्टल के कछुए को घर में रखने से रिश्तों में स्थिरता, धैर्य और विश्वास बढ़ता है। यह उपाय विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए लाभकारी माना जाता है जो जीवन में उतार–चढ़ाव से गुजर रहे हों।
लक्ष्मी–विष्णु की संयुक्त पूजा
विवाह पंचमी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त आराधना करना भी अत्यंत मंगलकारी है। इनकी पूजा से घर में आर्थिक समृद्धि और वैवाहिक जीवन में शांति स्थापित होती है। दंपति को जिम्मेदार, समझदार और सहयोगी बनने का आशीर्वाद मिलता है, जिससे उनके रिश्ते मजबूत और स्थिर बनते हैं। यह पूजा पारिवारिक सुख–समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है।