जैसे-जैसे शुक्रवार दोपहर चुनावी रुझान सामने आते गए, सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की हुई, वह था- चिराग पासवान। वजह साफ थी, एनडीए भारी बहुमत की ओर बढ़ रहा था और LJP(RV) ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया। राजनीतिक पंडितों ने उनकी तुलना उस खिलाड़ी से की, जो आखिरी ओवर में मैच पलट देता है। ठीक उसी अंदाज में चिराग ने NDA के लिए जबरदस्त फिनिशिंग टच दिया।
29 सीटों पर उतरी पार्टी ने दिखाया दम
इस चुनाव में LJP(RV) सिर्फ 29 सीटों पर मैदान में थी, जबकि भाजपा और जेडीयू दोनों 101–101 सीटों पर लड़ रहे थे। बड़ी पार्टियों ने शुरुआत मजबूत बनाई, लेकिन अंतिम घुड़सवार की भूमिका चिराग की पार्टी ने निभाई। जिस तरह टी-20 मैच में आखिरी ओवर का प्रदर्शन मैच का रुख बदल देता है, वैसा ही असर LJP(RV) ने वोटों में दिखाया और चुनावी समीकरण पूरी तरह एनडीए के पक्ष में मोड़ दिए।
2024 की जीत के बाद 2025 में दोबारा चमके चिराग
2024 लोकसभा चुनाव में पांच में से पांच सीटें जीतकर चिराग पहले ही बड़ी पहचान बना चुके थे। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें ‘हनुमान’ कहा था, और 2025 के नतीजों ने इस उपाधि को और मजबूत कर दिया। 29 में से 23 सीटों पर बढ़त हासिल करना किसी ‘लगभग परफेक्ट स्ट्राइक रेट’ जैसा रहा। मगध, सीमांचल और पाटलिपुत्र क्षेत्रों में उनका प्रदर्शन विशेष रूप से शानदार रहा।
NDA से मिले वोट बैंक ने किया कमाल
इस चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि एनडीए का वोट बैंक LJP(RV) को सुचारू रूप से ट्रांसफर हुआ। भाजपा और जेडीयू के समर्थकों ने चिराग के उम्मीदवारों पर भरोसा जताया और इसी के बदले में चिराग ने भी गठबंधन के प्रत्याशियों को पूरा समर्थन दिया। इस तालमेल ने एनडीए के लिए जीत की राह और भी आसान कर दी।
2020 से 2025 तक की चिराग की राजनीतिक यात्रा
2020 विधानसभा चुनाव में 137 सीटों पर लड़ने के बावजूद LJP(RV) सिर्फ एक सीट जीत पाई थी और उनकी ‘एंटी-नीतीश’ रणनीति ने जेडीयू को नुकसान पहुंचाया था। लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह उलट गई। एनडीए के साथ जुड़कर चिराग ने न सिर्फ अपनी पार्टी की पकड़ मजबूत की, बल्कि नीतीश कुमार और पूरे गठबंधन को अभूतपूर्व बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
NDA में और मजबूत होगा चिराग का कद
इन नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि चिराग पासवान NDA के भीतर एक निर्णायक भूमिका निभाते हैं। जेडीयू से पहले रही खटास के बावजूद यह प्रदर्शन उन्हें बिहार की राजनीति में नई ऊंचाई देगा। उनकी ‘हनुमान’ छवि मजबूत होगी और एनडीए के भीतर उनकी जगह और भारी हो जाएगी। अब उनके लिए भी “जडेजा स्टाइल” में जश्न मनाने का समय आ गया है- बैट उठाकर तलवार घुमाने वाले अंदाज में।