आज के दौर में लगभग हर घर की रसोई में रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल आम हो गया है। विज्ञापनों में इसे “हल्का”, “कोलेस्ट्रॉल-फ्री” और “दिल के लिए अच्छा” बताकर पेश किया जाता है। लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रिफाइंड ऑयल का प्रोसेसिंग तरीका ही इसे खतरनाक बना देता है। यह धीरे-धीरे शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचाता है और कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन जाता है।
कैसे बनता है रिफाइंड ऑयल?
रिफाइंड ऑयल किसी प्राकृतिक स्रोत- जैसे सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी, मकई या पाम से निकाला जाता है। लेकिन इसके बाद इसे कई बार केमिकल्स, हेक्सेन और बहुत ज्यादा तापमान पर प्रोसेस किया जाता है। इस प्रक्रिया में ऑयल का प्राकृतिक रंग, गंध और स्वाद तो खत्म हो जाता है, लेकिन साथ ही इसके सारे जरूरी न्यूट्रिएंट्स और विटामिन्स भी नष्ट हो जाते हैं। परिणामस्वरूप, यह एक ऐसा तेल बन जाता है जिसमें पोषण कम और नुकसान ज़्यादा होता है।
दिल के लिए खतरा बन रहा है यह तेल
रिफाइंड ऑयल में ट्रांस फैट और ओमेगा-6 फैटी एसिड की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। ये तत्व शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ाते हैं और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को घटाते हैं। इससे धीरे-धीरे धमनियों में ब्लॉकेज बनने लगता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि रिफाइंड ऑयल का अधिक सेवन करना सिगरेट पीने जितना खतरनाक साबित हो सकता है।
दिमाग पर भी डालता है बुरा असर
रिफाइंड ऑयल में मौजूद हानिकारक केमिकल्स और अनहेल्दी फैट्स, दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे याददाश्त कमजोर होती है और डिप्रेशन, तनाव व मूड स्विंग्स जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ जाती हैं। अगर बच्चे या बुजुर्ग लंबे समय तक इसका सेवन करते हैं, तो उनकी फोकस करने की क्षमता और मानसिक विकास पर गहरा असर पड़ सकता है।
मोटापा और डायबिटीज का कारण
इस तेल में कैलोरी और ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ा देती है। इससे ब्लड शुगर का स्तर बिगड़ जाता है और व्यक्ति मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और फैटी लिवर जैसी बीमारियों का शिकार हो सकता है। जो लोग तले-भुने और जंक फूड का ज़्यादा सेवन करते हैं, उनके लिए खतरा और भी बड़ा है।
लिवर और किडनी को भी नुकसान
रिफाइंड ऑयल में मौजूद फ्री रेडिकल्स और केमिकल्स लिवर की कोशिकाओं को कमजोर करते हैं। लिवर को इन टॉक्सिन्स को प्रोसेस करने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है, जिससे फैटी लिवर और लिवर इंफ्लेमेशन की समस्या बढ़ जाती है। साथ ही यह किडनी की कार्यक्षमता को भी प्रभावित करता है और शरीर में ज़हरीले तत्व जमा होने लगते हैं।
कैंसर का खतरा भी बढ़ाता है रिफाइंड ऑयल
जब रिफाइंड ऑयल को बार-बार गर्म किया जाता है, तो उसमें फ्री रेडिकल्स बनते हैं जो शरीर में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस बढ़ाते हैं। यह कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। शोध बताते हैं कि ज्यादा तले हुए खाद्य पदार्थों के सेवन से ब्रेस्ट, कोलन और स्किन कैंसर का रिस्क कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए, अगर आप सच में स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो रसोई से रिफाइंड ऑयल को जितना जल्दी हो सके अलविदा कह दें।