हर साल की तरह इस बार भी कृष्ण जन्माष्टमी की तारीख को लेकर भक्तों में असमंजस बना हुआ था। पंचांग की गणना और तिथियों के संयोग के कारण यह सवाल उठ रहा था कि जन्मोत्सव 16 अगस्त को होगा या 17 अगस्त को। लेकिन ज्योतिषियों के अनुसार अब स्पष्ट हो गया है कि इस साल भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव 16 अगस्त, शनिवार को मनाया जाएगा, जबकि अगले दिन 17 अगस्त को नंदोत्सव होगा।
कब से कब तक रहेगी अष्टमी तिथि?
अष्टमी तिथि का आरंभ 15 अगस्त की रात 11:49 बजे से होगा और इसका समापन 16 अगस्त की रात 9:34 बजे होगा। चूंकि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अर्धरात्रि में हुआ था, इसलिए 16 अगस्त की रात ही उनका जन्मोत्सव मनाना शुभ रहेगा।
निशिता पूजा का समय:
रात 12:04 बजे से 12:47 बजे तक (कुल 43 मिनट)
मथुरा-वृंदावन में क्यों है खास?
मथुरा को भगवान कृष्ण की जन्मभूमि और वृंदावन को लीलाभूमि माना जाता है। यहां जन्माष्टमी का उत्सव भक्ति और उल्लास के रंग में डूबा रहता है।
मथुरा- श्रीकृष्ण जन्मस्थान:
रात के12 बजे जैसे ही भगवान का जन्म होता है, मंदिर परिसर में “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष गूंजने लगते हैं। भगवान का महाभिषेक होता है और भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाता है।
वृंदावन- बांके बिहारी मंदिर:
यहां जन्मोत्सव की तैयारियां हफ्तों पहले से शुरू हो जाती हैं। मंदिर को फूलों और रंगीन रोशनी से सजाया जाता है। रात 12 बजे मंगला आरती होती है, जिसके दर्शन के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं।
नंदोत्सव- 17 अगस्त
जन्माष्टमी के अगले दिन नंदोत्सव मनाया जाता है, जो भगवान कृष्ण के जन्म की खुशी का प्रतीक है। इस दिन मंदिरों में मिठाइयां, फल, खिलौने और सिक्के बांटे जाते हैं। सुबह से ही भजन-कीर्तन का माहौल भक्तों को भक्ति रस में डुबो देता है।
भक्तों के लिए संदेश
अगर आप जन्माष्टमी का आनंद मथुरा या वृंदावन में लेना चाहते हैं, तो 16 अगस्त की रात ही ब्रज पहुंचें, क्योंकि इसी रात कान्हा के जन्म का दिव्य पर्व मनाया जाएगा। अगले दिन नंदोत्सव में भी शामिल होकर भक्ति और उत्सव का पूरा आनंद लिया जा सकता है।
इस तरह, 16 अगस्त की रात कान्हा के जन्म का पर्व और 17 अगस्त को नंदोत्सव होने से दोनों ही दिन भक्तों के लिए खास रहेंगे।
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