उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर समेत पूरे राज्य में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है। मई-जून का महीना पशुपालकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी दौरान उन्हें अपने पालतू पशुओं की सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। खासकर मादा बछियों और पड़ियों के लिए यह समय और भी संवेदनशील होता है, क्योंकि ये प्रजनन के लिए तैयार होती हैं। ऐसे में पशुपालन विशेषज्ञों का कहना है कि पहली हीट से पहले ब्रूसेला का टीका जरूर लगवाना चाहिए, ताकि गर्भपात और दूध उत्पादन में कमी जैसी समस्याओं से बचा जा सके।
एक बार लगवाएं टीका, हमेशा के लिए हो जाएं निश्चिंत
पशुपालन विभाग के अनुसार, ब्रूसेला एक गंभीर और संक्रामक रोग है, जो मादा पशुओं को गर्भवती होने के बाद प्रभावित करता है। इस बीमारी के कारण गर्भधारण के अंतिम तीन महीनों में गर्भपात हो जाता है। अगर समय पर टीका न लगे, तो पशुपालकों को एक पशु के हिसाब से लगभग 1.5 लाख रुपये तक का नुकसान हो सकता है। ब्रूसेला का टीका केवल पहली बार हीट में आने वाली मादा बछिया या पड़िया को ही लगाया जाता है, और इसे जीवन में केवल एक बार ही देना होता है।
मानसून से पहले करें ये जरूरी काम
कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर के पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. शिवकुमार यादव का कहना है कि बरसात का मौसम पशुओं के लिए कई बीमारियां लेकर आता है। खासकर खुरपका, मुंहपका और गलाघोंटू जैसी बीमारियां इस मौसम में तेजी से फैलती हैं। इसलिए मानसून शुरू होने से पहले ही पशुओं को कृमिनाशक दवा देना और आवश्यक टीकाकरण कराना बहुत जरूरी है।
दूध उत्पादन में कमी से बचाएगा यह टीका
ब्रूसेला वैक्सीन का एक और बड़ा फायदा यह है कि इससे पशुओं में दूध उत्पादन की क्षमता बनी रहती है। जो पशुपालक इस टीके को समय पर लगवाते हैं, उनके पशु स्वस्थ रहते हैं और अच्छी मात्रा में दूध भी देते हैं। यही नहीं, यदि टीकाकरण के बावजूद पशु किसी बीमारी की चपेट में आ जाते हैं, तो भी वे जल्दी ठीक हो जाते हैं और नुकसान की आशंका कम हो जाती है।
पशुपालकों के लिए बड़ी राहत
गर्मी और बरसात के बीच का यह समय पशुपालकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। अगर वे इस दौरान सही कदम उठाएं, जैसे – ब्रूसेला टीकाकरण, कृमिनाशक दवा, और साफ-सफाई का ध्यान – तो उनके पशु साल भर स्वस्थ रहेंगे। इससे न केवल दूध उत्पादन में बढ़ोतरी होगी, बल्कि मुनाफा भी कई गुना बढ़ जाएगा।
सरकार भी कर रही है मदद
राज्य सरकार की ओर से भी समय-समय पर टीकाकरण अभियान चलाए जाते हैं। पशुपालकों को चाहिए कि वे नजदीकी पशु चिकित्सालय या सरकारी शिविरों से संपर्क करें और समय रहते अपने पशुओं का टीकाकरण कराएं।
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