‘Terrorist’ शब्द से गरमाई सियासत, सपा सांसद इकरा हसन के बयान से भड़के हिंदू संगठन, एक्शन की मांग

मुजफ्फरनगर: समाजवादी पार्टी की युवा सांसद इकरा हसन के एक बयान ने उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है। हाल ही में किसान नेता राकेश टिकैत के साथ हुई धक्कामुक्की के विरोध में आयोजित एक महापंचायत में इकरा हसन ने विरोधियों की तुलना आतंकवादियों से कर दी। उनके इस बयान पर हिंदू संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और कार्रवाई की मांग को लेकर प्रशासन के दरवाज़े खटखटाए हैं।

दरअसल, भारतीय किसान यूनियन द्वारा मुजफ्फरनगर में आयोजित महापंचायत में सपा सांसद इकरा हसन, हरेंद्र मलिक और विधायक अतुल प्रधान मंच पर मौजूद थे। इसी दौरान इकरा हसन ने कहा, “बाबा राकेश टिकैत समाज में एकता का संदेश देने जन आक्रोश रैली में गए थे। लेकिन जिन लोगों ने उनके साथ बर्बरता की, वे किसी आतंकी से कम नहीं हैं। हम ऐसे लोगों का पुरजोर विरोध करते हैं।”

इकरा हसन के इस बयान को लेकर संयुक्त हिंदू मोर्चा ने तीखा विरोध जताया है। संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुजफ्फरनगर के एसएसपी अभिषेक सिंह से मुलाकात की और इकरा हसन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। मोर्चा के संस्थापक मनोज सैनी ने तो यहां तक कहा कि, “पाकिस्तान का विरोध करने वालों को आतंकी बताने वाली इकरा हसन पर आतंकी गतिविधियों के तहत मुकदमा दर्ज होना चाहिए। उनके मोबाइल और बैंक खातों की जांच भी होनी चाहिए कि कहीं उनका खुद का कोई लिंक तो आतंकवादी संगठनों से नहीं है।”

इस मामले पर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और मुजफ्फरनगर से भाजपा सांसद संजीव बालियान ने कहा, “इकरा हसन को अपने पद की गरिमा का ख्याल रखना चाहिए। वह नई सांसद हैं और अति उत्साह में ऐसा बयान दे बैठी होंगी, लेकिन मुजफ्फरनगर जैसी संवेदनशील जगह पर ऐसे बयान नहीं दिए जाने चाहिए।”

इकरा हसन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं और सांप्रदायिक सौहार्द्र बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। महापंचायत जैसे मंच पर ‘आतंकी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल न सिर्फ विवाद को जन्म देता है, बल्कि राजनीतिक ध्रुवीकरण को भी हवा दे सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब बयानों की भाषा भी एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। एक तरफ जहां विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी बता रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल और हिंदू संगठन इसे सामाजिक सौहार्द्र के लिए खतरा मान रहे हैं। प्रशासन अब किस दिशा में कदम उठाता है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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Author: The Hindi Post