उत्तर प्रदेश के संभल जिले में तैनात सीओ अनुज चौधरी को उनके पद से हटा दिया गया है। उन्हें अब चंदौसी का सीओ बनाया गया है। यह तबादला ऐसे समय में किया गया है जब उनकी पहले दी गई क्लीन चिट को निरस्त कर दिया गया और उनके खिलाफ दोबारा जांच शुरू हो गई है। अनुज चौधरी अब चंदौसी कोर्ट और राष्ट्रीय ऑटोमैटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) के तहत कार्यरत रहेंगे। उनकी जगह अब एएसपी आलोक कुमार को संभल का नया सर्कल ऑफिसर नियुक्त किया गया है।
यह फैसला उस वक्त आया है जब संभल में धार्मिक तनाव का माहौल बना हुआ है। कोट गर्वी इलाके में स्थित शाही जामा मस्जिद से जुड़े अदालती आदेश के दौरान भड़की हिंसा में चार लोगों की जान चली गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। हिंसा के बाद इलाके में भारी तनाव और सुरक्षाबलों की तैनाती रही। इसी दौरान अनुज चौधरी का एक बयान चर्चा का विषय बन गया।
क्या था अनुज चौधरी का बयान?
सीओ अनुज चौधरी ने होली के मौके पर एक बयान में कहा था कि अगर किसी को रंगों से असहजता है तो वे उस दिन घर के अंदर रहें क्योंकि होली साल में एक बार आती है, जबकि जुमा हर साल 52 बार आता है। उन्होंने दोनों समुदायों से आपसी सम्मान बनाए रखने की अपील की थी। उनका कहना था कि जिस तरह मुसलमान ईद का बेसब्री से इंतजार करते हैं, उसी तरह हिंदू होली का। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी पर जबरन रंग न डालें और सभी को अपने-अपने त्योहार मनाने की स्वतंत्रता और सम्मान मिलना चाहिए।
हालांकि, यह बयान सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर तीखी प्रतिक्रिया का कारण बना। लोगों के एक वर्ग ने उनके बयान को सांप्रदायिक सौहार्द के खिलाफ बताया और पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने मार्च में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई और अब उन्हें मिली क्लीन चिट को निरस्त कर दोबारा जांच के आदेश दिए गए हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों की सख्ती
चौधरी के बयानों पर विवाद बढ़ने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके मीडिया बयानों पर रोक लगा दी थी। इस विवाद और जांच के कारण उन पर सख्त निगरानी रखी जा रही थी। अब तबादले के साथ ही उन्हें चंदौसी कोर्ट और NAFIS की निगरानी में भेजा गया है, जिससे यह स्पष्ट है कि उन्हें अब सीमित भूमिका में रखा गया है।
जनता की मिली-जुली प्रतिक्रिया
अनुज चौधरी के तबादले पर जनता की प्रतिक्रिया मिश्रित रही है। कुछ लोग उनके बयान को संतुलित और सभी समुदायों के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाला मानते हैं, जबकि अन्य इसे भड़काऊ और पक्षपाती मानते हैं। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और पुलिस की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
संभल के सीओ पद से अनुज चौधरी का हटाया जाना और उनके खिलाफ दोबारा जांच शुरू होना उनके करियर के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। बयानबाज़ी से उठे विवाद ने न केवल उनकी छवि पर असर डाला बल्कि कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों को भी उजागर कर दिया है। अब यह देखना होगा कि जांच के नतीजे क्या आते हैं और अनुज चौधरी की प्रशासनिक जिम्मेदारियां भविष्य में किस दिशा में जाती हैं।
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