भारत में डायबिटीज अब सिर्फ ब्लड शुगर की बीमारी नहीं रही, यह एक ऐसी लाइफस्टाइल डिज़ीज़ बन चुकी है जो धीरे-धीरे पूरे शरीर पर असर डालती है। खासकर जोड़ों में दर्द, अकड़न और सूजन जैसे लक्षण डायबिटीज के मरीजों में आम होते जा रहे हैं। कई बार मरीज समझ ही नहीं पाते कि ब्लड शुगर का उनके हड्डियों और जोड़ों से क्या संबंध है। आइए जानते हैं डायबिटीज और जोड़ों के दर्द के पीछे की वजह और उससे राहत पाने के उपाय।
कैसे जुड़ा है डायबिटीज और जोड़ों के दर्द का रिश्ता?
डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन का प्रभाव कम हो जाता है या उसका निर्माण रुक जाता है। इससे मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ता है और टिशूज़ की कार्यप्रणाली गड़बड़ा जाती है। खासतौर पर जोड़ों के पास मौजूद मांसपेशियों और लुब्रिकेशन की कमी से जोड़ों में अकड़न और दर्द शुरू हो जाता है। यही कारण है कि डायबिटिक मरीजों को घुटनों, कंधों और उंगलियों में जकड़न और दर्द की शिकायत रहती है।
डायबिटीज में कौन से दर्द होते हैं आम?
सबसे ज्यादा शिकायत फ्रोजन शोल्डर की होती है, जिसमें कंधे में तीव्र दर्द और मूवमेंट में दिक्कत आती है। इसके अलावा डायबेटिक न्यूरोपैथी में पैरों की नसों में जलन, सुन्नपन और झनझनाहट महसूस होती है। कई बार उंगलियों की गांठें सख्त हो जाती हैं, जिसे ड्यूप्यूट्रेन कॉन्ट्रैक्चर कहते हैं। इन स्थितियों में मरीज के लिए चलना-फिरना तक मुश्किल हो जाता है।
क्यों बिगड़ते हैं जोड़ डायबिटीज में?
डायबिटीज नसों और ब्लड वेसल्स को कमजोर कर देता है, जिससे टिशूज को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिलते। इससे सूजन, दर्द और अकड़न बढ़ने लगती है। साथ ही हाई ब्लड शुगर के कारण सूजन पैदा करने वाले केमिकल्स शरीर में एक्टिव हो जाते हैं। डायबिटीज से इम्यूनिटी भी कम हो जाती है, जिससे छोटी-मोटी समस्याएं भी लंबे समय तक बनी रहती हैं।
दर्द से राहत के उपाय
ब्लड शुगर कंट्रोल करें: डायबिटीज को नियंत्रित रखना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
हल्की फिजिकल एक्टिविटी करें: रोजाना टहलना, हल्का योग और स्ट्रेचिंग जोड़ों को लचीलापन देता है।
गर्म सेंक और मलहम: प्रभावित हिस्सों पर हल्का गर्म पानी सेंकने से राहत मिलती है।
संतुलित आहार: फाइबर, फल, हरी सब्जियां, सूखे मेवे और कम वसा वाला खाना फायदेमंद है।
दवा का सहारा: जरूरत हो तो डॉक्टर की सलाह से दर्दनाशक दवाएं या मलहम लें।
कब लें डॉक्टर की मदद?
अगर जोड़ों में लगातार दर्द हो रहा है, सूजन बढ़ रही है, चलना-फिरना मुश्किल हो रहा है या रात में नींद टूट रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। कई बार ये लक्षण किसी अन्य गंभीर बीमारी जैसे रूमेटॉइड आर्थराइटिस या ऑस्टियोआर्थराइटिस के संकेत भी हो सकते हैं।
समय पर चेतावनी ही है सबसे बड़ी सुरक्षा
डायबिटीज और जोड़ों के दर्द से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि समय रहते समझदारी दिखाने की जरूरत है। अपनी दिनचर्या में थोड़े बदलाव, खानपान में संतुलन और नियमित एक्सरसाइज से इस परेशानी को काफी हद तक रोका जा सकता है। डॉक्टर की सलाह को नजरअंदाज न करें, क्योंकि छोटी-छोटी सावधानियां भविष्य में बड़ी राहत बन सकती हैं।;