चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर देशभर के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। जिन श्रद्धालुओं के लिए जम्मू-कटरा स्थित माता वैष्णो देवी धाम तक पहुंचना कठिन होता है, उनके लिए कानपुर का दामोदर नगर स्थित वैष्णो देवी मंदिर एक बेहतरीन विकल्प बन चुका है। यहां भी कटरा की तर्ज पर एक संकरी गुफा बनाई गई है, जिससे होकर भक्त माता के दर्शन करते हैं।
कटरा की तर्ज पर बनाई गई गुफा
कानपुर के दक्षिण जोन में स्थित इस मंदिर में श्रद्धालुओं को कटरा की अनुभूति कराई जाती है। गुफा से होकर माता के दर्शन करने पर भक्तों को जम्मू-कटरा जैसी ठंडक का एहसास होता है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां का वातावरण पूरे वर्ष ठंडा बना रहता है, जिससे श्रद्धालु स्वयं को जम्मू के कटरा में ही महसूस करते हैं। भक्त माता के जयकारे लगाते हुए गुफा से गुजरते हैं और पिंडी स्वरूप में विराजमान वैष्णो देवी के दर्शन करते हैं।
24 साल पहले हुआ था मंदिर का निर्माण
इस मंदिर की स्थापना वर्ष 2000 में हुई थी। मंदिर के संस्थापक जेबी राणा को माता ने स्वप्न में दर्शन देकर मंदिर निर्माण का संकेत दिया था। उन्होंने बताया था कि यह स्थान 5000 वर्ष पुराना है और यहां माता का मंदिर बनाया जाना चाहिए, ताकि कटरा न जा पाने वाले भक्त यहां आकर दर्शन कर सकें। माता के आदेश का पालन करते हुए इस मंदिर का निर्माण कराया गया, जो आज कानपुर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक बन चुका है।
एक हजार हाथों वाली देवी की अनूठी मूर्ति
इस मंदिर में माता वैष्णो देवी के अलावा कई अन्य हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। इनमें सबसे खास और अद्भुत प्रतिमा एक हजार हाथों वाली माता की है, जो ब्रह्मांड में अपनी तरह की एकमात्र मूर्ति मानी जाती है। इस विशेष प्रतिमा के दर्शन के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं और नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
भैरव नाथ के दर्शन के बिना अधूरे माने जाते हैं दर्शन
जैसे कटरा में माता के दर्शन के बाद भैरव नाथ के दर्शन अनिवार्य माने जाते हैं, वैसे ही इस मंदिर में भी माता के दर्शन के बाद भक्त भैरव नाथ का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते। मंदिर के पुजारियों के अनुसार, नवरात्रि के दौरान यहां रोज़ाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।;