धर्मनगरी संभल की पहचान आज उत्तर प्रदेश के प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों में से एक है। संभल के 68 में से 6 प्रमुख तीर्थस्थल और 19 प्राचीन कुएं मिले हैं, जो सनातन धर्म के प्राचीन निशान हैं। ASI टीम ने शनिवार को नगर में कुल 22 स्थलों का निरीक्षण किया। टीम के मुताबिक एक महीने के अंदर ही सर्वे के परिणाम सामने आ जाएंगे।
संभल में 6 तीर्थ स्थलों की पहचान हो चुकी है, 19 कूप ढूंढ लिए गए है। ये खोज भारतीय इतिहास और संस्कृति के महत्वपूर्ण पहलू को उजागर करती है। सर्वे करने आई ASI टीम ने भले ही सर्वे पूरा होने का ऐलान कर दिया है, लेकिन अभी भी यहां पर 62 तीर्थों की पहचान होनी बाकी है.इसके अलावा 36 पुरों और 52 सरायों की भी पहचान होनी बाकी है, जिनके बारे में विभिन्न पौराणिक ग्रंथों में विवरण मिलता है।
संभल डीएम ने सार्वजनिक किया पत्र
संभल के डीएम ने शनिवार को एक पत्र सार्वजनिक किया। जो बीते 14 दिसंबर को ASI डॉयरेक्टर को लिखा गया था। जिसमें SDM डॉ. वंदना मिश्रा ने बताया कि संभल में 19 कूप और 6 तीर्थों की पहचान की जा चुकी है, इन धार्मिक स्थानों का काल निर्धारण जरूरी है। SDM के इस पत्र को ध्यान में रखते हुए ASI ने रविवार को कल्कि मंदिर समेत 22 स्थानों का सर्वे किया और फोटो-वीडियो लिए, साथ ही कृष्ण कूप भी देखा। सर्वे खत्म होने के बाद ASI टीम ने बताया कि अगले एक महीने के अंदर सर्वे की रिपोर्ट जारी कर दी जाएगी।
ग्रंथों का संदर्भ, कूपों और तीर्थस्थलों की पहचान
पुराणों और विभिन्न संस्कृत ग्रंथों में दर्ज वर्णन के अनुसार, भारत में अनेक तीर्थ स्थल थे जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण माने जाते थे। इन स्थानों पर भगवानों के पवित्र चरण पड़े थे और यहां साधना करने से पुण्य की प्राप्ति होती थी। संभल में मिले 6 प्रमुख तीर्थस्थलों का विवरण भी इन्हीं ग्रंथों में मिलता है, जिनका अस्तित्व कालांतर में समाप्त हो चुका था।
19 प्राचीन कूपों की पहचान
सर्वे में मिले कुएं प्राचीन समय के जल प्रबंधन और स्थानीय जीवन की संस्कृति को दर्शाते हैं। कहते हैं कि इन कुओं के आसपास पूजा और साधना होती थी, और इनमें स्नान से पुण्य की प्राप्ति होती थी। 19 कूपों में से पहला कूप चतुर्मुख कूप है,जो आलम सराय में पानी की टंकी के पास स्थित है, दूसरा अमृत कूप दुर्गा कॉलोनी स्थित कूप मंदिर में है, तीसरा अशोक कूप हल्लू सराय मोहल्ले में है, चौथा सप्तसागर कूप है. यह सरथल चौकी के पास सर्थलेश्वर मंदिर में स्थित हैं। पांचवा बलि कूप पुरानी तहसील के पास है, छठां कूप हयातनगर में धर्म कूप के नाम से विख्यात है, सातवां कूप कोट पूर्वी मुहल्ले के शिवमंदिर में ऋषिकेश कूप के नाम से है, 8वां कल्कि मंदिर के पास परासर कूप है और 9वां संभल कोतवाली के सामने अकर्ममोचन कूप के नाम से प्रसिद्ध है।
प्रसिद्ध कल्कि मंदिर में मिला परासर कूप
संभल के इन तीर्थों और कूपों की खोज ASI टीम और अन्य धार्मिक शोध संस्थाओं द्वारा की जा रही है।वहीं जामा मस्जिद चौकी के नीचे 10वां कूप धरणि वाराह कूप है, रात वाली मस्जिद के पास 11वां और जामा मस्जिद परिसर में 12वां प्राचीन कूप है। बाल विद्या मंदिर के सामने 13वां कूप है, तो 14वां कूप न्यारियों वाली मस्जिद परिसर में स्थित है। 15वां प्राचीन कूप गद्दियों वाले मुहल्ले में है, सेठों वाली गली में 16वां कूप पाया गया है। 17वां प्राचीन कूप एजेंटी चौराहे के पास और 18वां कूप खग्गू सराय मुहल्ले में मिला है। वहीं 19वें कूप की खोज कल्कि विष्णु मंदिर स्थित कृष्णा कूप के रूप में हुई है।
संस्कृति और आध्यात्मिक जुड़ाव
संभल की यह खोज केवल एक ऐतिहासिक पहलू नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक यात्रा का भी प्रतीक है। इन धार्मिक स्थलों और कुओं के माध्यम से हम अपने पूर्वजों की जीवनशैली, उनके धार्मिक विश्वासों और उनकी प्रकृति के प्रति श्रद्धा को समझ सकते हैं। इस खोज ने यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय संस्कृति और धर्म का इतिहास केवल धर्मग्रंथों तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे परिवेश, जलवायु, और हमारे भीतर बसी सांस्कृतिक धारा में भी झलकता है।
संभल का पुनरुत्थान, 6 तीर्थ मिले, 62 तीर्थों की पहचान बाकी
संभल एक बार फिर से तीर्थयात्रियों और इतिहासकारों के बीच एक महत्वपूर्ण स्थल बन गया है।संभल एसडीएम के मुताबिक पौराणिक ग्रंथों में 68 तीर्थों का विवरण है, जिसमे से 6 तीर्थ की पहचान हो चुकी है। जिसमें हौज भदेसरा में भद्रका आश्रम पहला तीर्थ है। दूसरा जलालपुर मोहम्मदाबाद में स्वर्गदीप तीर्थ है। तीसरा तीर्थ जलालपुर में चक्रपाणि तीर्थ के नाम से मिला है। चौथा तीर्थ को श्मशान या प्राचीन तीर्थ के नाम से जाना जाता हैं जो आर्य कोल्ड स्टोरेज के पास है। पांचवें तीर्थ कल्कि विष्णु मंदिर के रुप से जाना जाता है। पौराणिक ग्रंथों में संभल भगवान नारायण की अवतार स्थली के रुप में बताई गई है। जिला प्रशासन के आग्रह पर टीम ने सभी स्थानों का सर्वे भी कर लिया है. अब यहां 62 तीर्थ, 36 पुरे और 52 सरायों की पहचान होनी बाकी है.ये स्थल अब केवल एक धार्मिक स्थान नहीं है, बल्कि यहां की समृद्ध संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व को जानने के लिए पर्यटकों और शोधकर्ताओं का आना-जाना बढ़ने लगा है।