जॉर्ज सोरोस भारत में इस वक्त चर्चा का विषय बने है.भारत की संसद से लेकर मीडिया तक चारों तरफ उनकी ही बातें हो रही हैं. कांग्रेस-बीजेपी एक दूसरे के आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं लेकिन अमेरिका के रहने वाले सोरोस की बातें सात समुंदर के पार हो रही हैं. तो इतना तो समझ आता है कि वह एक प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले इंसान है. यूं तो विवादों से जार्च सोरोस का पुराना नाता रहा है. पहले भी कई बार सोरोस सुर्खियों में रह चुके हैं.
प्रभावशाली व्यक्ति हैं जॉर्ज सोरोस
जॉर्ज सोरोस अमेरिका के एक अरबपति व्यक्ति है. वैश्विक राजनीति में उनका अच्छा खासा प्रभाव है. जॉर्ज सोरोस एक प्रभावशाली व्यक्ति है लेकिन मौजूदा समय में जॉर्ज सोरोस भारत में चर्चा का विषय बन गए है. जॉर्ज सोरोस को लेकर भारत की संसद से लेकर मीडिया तक बहस जोरों पर है. सोरोस का गांधी परिवार के साथ संबंधों को लेकर भारतीय संसद में जमकर हंगामा चल रहा है.
सोरोस ने की थी मोदी, ट्रंप और जिनपिंग की आलोचना
सोरोस के ऊपर आरोप लगे हैं कि राष्ट्रवाद के प्रसार से निपटने के लिए उन्होंने एक यूनिवर्सिटी को एक अरब डॉलर देने का ऐलान किया था. साथ ही इस मंच से उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की खूब आलोचना की थी. जिसके बाद सोरोस चर्चाओं में आ गए थे.
करेंसी मैनिपुलेशन के हैं गंभीर आरोप
सोरोस पर ग्लोबल करेंसी मैनिपुलेशन के आरोप भी लगे हैं. ऐसा माना जाता है कि उनकी वजह से साल 1997 में एशिया की कुछ देशों में वित्तीय संकट खड़ा हो गया था. सोरोस के ऊपर मलेशिया और थाईलैंड की करेंसी से छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोप भी लगे हैं. करेंसी मैनिपुलेशन की वजह से कई देशों में तख्तापट हो गया. साउथ कोरिया में पहली बार किसी विपक्षियों उम्मीदवार ने राष्ट्रपति चुनाव जीता था. तो इंडोनेशिया में तीन दशकों की आर्थिक वृद्धि के बावजूद सूहार्तो को सत्ता गंवानी पड़ी थी.
यूके में भी सोरोज के ऊपर लगे हैं गंभीर आरोप
यूके के लोग सोरोस को बुरा आदमी मानते हैं. उनके मुताबिक बैंक ऑफ़ इंग्लैंड को बर्बाद करने में उनका अहम योगदान है. उनके ऊपर आरोप है कि उन्होंने पहले बैंक से पाउंड उधार लिए फिर उन्हें भेज दिया. इससे उस वक्त यूके की करेंसी कमजोर हो गई थी. इस पूरे मामले में सोरोस के ऊपर अरब डॉलर को मुनाफा कराने के भी आरोप लगे थे.
सोरोस पर तख्तापलट कराने का आरोप
साल 2013 में जब मिडिल ईस्ट बदलाव के दौर से गुजर रहा था. तब सोरोस के ऊपर अरब स्प्रिंग के पीछे स्थानीय संगठनों को भी फंडिंग करने का आरोप लगा था. साल 2011 में कई मुल्कों में विद्रोह किया था जिसमें ट्यूनीशिया और मिश्र जैसे देशों में तख्तापलट हो गया था. सोरोस के ऊपर आरोप है कि उन्होंने सोवियत संघ और मध्य एशिया के रंगीन क्रांतियां को भी प्रोत्साहित किया था.
बीजेपी-कांग्रेस पर वार-पलटवार
देश में गांधी परिवार और सोरोस के संबंधों को लेकर भाजपा लगातार संसद में कांग्रेस को घेर रही है. हालांकि इस मामले में कांग्रेस ने भी बीजेपी पर पलटवार किया है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा के कई नेता सोरोस के संस्थान से लाभ लेते हैं. सोरोस ने मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं जिसके बाद भारत में सियासत गरमा गई थी.
कौन हैं जॉर्ज सोरेस ?
साल 1930 में हंगरी देश में जन्मे जॉर्ज सोरोस एक यहूदी परिवार से ताल्लुक रखते हैं. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नाजी उत्पीड़न से बचने में जॉर्ज सोरोस का परिवार सफल रहा था. 1947 में उनका परिवार लंदन पहुंच गया. इसके बाद लंदन की स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में उन्होंने पढ़ाई पूरी की. साल 1956 में उन्होंने अमेरिका जाकर निवेश की दुनिया में कदम रखा और साल 1970 में उन्होंने अपना आगे फंड सोरोज फंड मैनेजमेंट स्थापित किया. दुनिया के सफल निवेशकों में सोरोस की गिनती होती है.
जॉर्ज सोरोस ने कीं तीन शादियां
जॉर्ज सोरोस ने अपनी निजी जीवन में तीन शादियां की. पहली पत्नी से उनके तीन बच्चे थे लेकिन सोरोस की पहली शादी ज्यादा नहीं चल पाई. पहली पत्नी से तलाक के बाद सोरोस ने दूसरी शादी की. दूसरी पत्नी से उनके दो बच्चे हुए लेकिन फिर साल 2005 में उन्होंने अपनी दूसरी पत्नी से तलाक ले लिया. इसके बाद उन्होंने एक जापानी अमेरिकी महिला से तीसरी शादी की है. बता दें कि सोरोस ने अपने जीवन में 15 किताबें लिखी हैं. जो कि पूरी दुनिया में काफी लोकप्रिय हैं.