आज तक हम सब ने मां गंगा को मैली और काली ही देखा है. लाख साफ सफाई के बावजूद भी उनका रंग नहीं बदलता. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि, ऐसा क्यों है? आखिर किसके श्राप की वजह से मां गंगा अब तक मैली हैं?
पौराणिक कथाएं
पौराणिक कथाओं से ही हम ऐसा सुनते चले आ रहे हैं, कि मां गंगा की मैली और काली होने का श्राप मिला है. जिस वजह से वो आज भी ऐसी ही नजर आती हैं.
मां पार्वती और गंगा का अवरण
ऐसी मान्यता है कि मां पार्वती हिमालय की पुत्री हैं. और मां गंगा का अवतरण भी हिमालय से ही हुआ है.
बहनें हैं मां पार्वती और गंगा
हिमालय की पुत्रियां होने की वजह से मां पार्वती और मां गंगा आपस में बहने हैं. लेकिन ऐसी कौन सी वजह है, जिसके चलते मां पार्वती ने उन्हें ये श्राप दे दिया?
प्रचलित कथाएं
कई पौराणिक कथाओं के अनुसार कैलाश में भगवान शिव मां पार्वती के साथ ध्यान पर बैठे थे.
मां गंगा का निवेदन
जब भगवान शिव ने अपनी आंखें खोलीं तो, उनके सामने मां गंगा हाथ जोड़े हुए खड़ी थीं. उनके स्वरूप को देखकर मोहित होते हुए वो बोलीं कि, वो उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करें.
मां पार्वती हुईं क्रोधित
मां गंगा के ये शब्द जब मां पार्वती के कानों में पड़े तो, उन्हें काफी क्रोध आया.
मां गंगा की बात
मां पार्वती को क्रोधित देख मां गंगा ने कहा कि, भले ही आप उनकी पत्नी हों, लेकिन वो मुझे अपनी जटाओं में धारण करते हैं.
मां पार्वती ने दिया श्राप
ऐसे में मां पार्वती ने गंगा को श्राप दिया, और कहा कि, गंगा में मृत देह बहेंगे. मनुष्यों के पाप धोते धोते तुम मैली और काली हो जाओगी.
मां गंगा को हुआ एहसास
श्राप सुनते ही मां गंगा को अपनी गलती का एहसास हुआ. उन्होंने मां पार्वती से क्षमा मांगी और श्राप वापस लेने को कहा.
भगवान शिव का आशीर्वाद
मां गंगा का पश्चाताप देखते हुए, भगवान शिव ने उन्हें श्राप से मुक्त कर दिया. और आशीर्वाद देते हुए कहा कि जो भी तुम्हारे जल से स्नान करेगा, उसके सारे पाप धुल जाएंगे.