सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विधायक अब्बास अंसारी को बड़ी राहत दे दी है. कोर्ट ने सुभासपा विधायक अब्बास अंसारी को मनी लॉन्ड्रिंग केस और चित्रकूट जेल में अवैध तरीके से पत्नी से मुलाकात मामले में जमानत दी गई है. हालांकि गैंगस्टर एक्ट से जुड़े लंबित आरोपों के कारण अभी भी अब्बास अंसरी जेल से बाहर नहीं निकल पाएंगे. गैंगस्टर और राजनेता एवं पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी के पुत्र हैं अब्बास अंसारी. मुख्तार अंसारी की कुछ महीनों पहले ही जेल में मौत हो गई थी. धनशोधन मामले में न्यायमूर्ति एम. एम, सुंदरेश और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने अंसारी को राहत दे दी है.
14 अगस्त को ईडी से सुप्रीम कोर्ट ने मांगा था जवाब
उच्चतम न्यायालय ने 14 अगस्त को प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी कर अंसारी की उस याचिका पर जवाब मांगा था, जिसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा अंसारी की जमानत याचिका खारिज करने के आदेश को चुनौती दी गई थी. उच्च न्यायालय ने अंसारी की जमानत याचिका 9 मई को खारिज कर दी थी. उच्च न्यायालय ने कहा था कि ‘फ्लो चार्ट’ सहित रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से स्पष्ट रूप से धन के स्रोत का पता चल रहा है और इससे भी यह भी पता चलता है कि आरोपी अंसारी के खातों में धन कैसे पहुंचाया गया, इसलिए अदालत को लगता है कि वह इस स्तर पर जमानत के हकदार नहीं हैं. अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि दो कंपनियों मेसर्स विकास कंस्ट्रक्शन और मेसर्स आग़ाज़ के साथ अंसारी के धन के लेनदेन के संकेत मिले हैं. ईडी ने आरोप लगाया कि अंसारी ने धन शोधन के लिए इन कंपनियों का इस्तेमाल किया गया है.
4 नंवबर 2002 को दर्ज हुआ था धन शोधन मामले में मुकदमा
ईडी द्वारा पिछले 3 मामलों के आधार पर धन शोधन रोकथाम कानून, 2002 के तहत सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के विधायक अंसारी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. अंसारी पर 4 नंवबर 2002 को धन शोधन मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था. उत्तर प्रदेश की मऊ सीट से विधायक अंसारी अभी कासगंज जेल में बंद हैं.