Karnataka के CM पर FIR दर्ज, इस मामले में अब बढ़ी मुश्किलें, सबकुछ पढ़ें

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं. दरअसल मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा भूमि आवंटन से जुड़े कथित घोटाले के मामले में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ कर्नाटक की भ्रष्टाचार निरोधक निकाय ने शुक्रवार को मामला दर्ज कर लिया है. ये मामला यहां की एक विशेष अदालत द्वारा सिद्धारमैया के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस जांच के आदेश दिए जाने के 2 दिन बाद किया गया है. इसमें सिद्धारमैया की पत्नी पर मानदंडों का उल्लंघन करते हुए MUDA द्वारा प्रीमियम संपत्तियां आवंटित करने के आरोप लगाए गए हैं.

FIR में सिद्धारमैया को बनाया गया पहला आरोपी

वहीं सीएम सिद्धारमैया को FIR में पहले आरोपी के तौर पर नामजद किया गया है. उसके बाद उनकी पत्नी पार्वती, साले मल्लिकार्जुन स्वामी और कथित ज़मीन मालिक देवराज का नाम दर्ज किया गया है. आरोपों के अनुसार, मैसूर विकास निकाय ने पार्वती के स्वामित्व वाली ज़मीन का एक टुकड़ा अधिग्रहित किया और उसे उच्च मूल्य के भूखंडों के साथ मुआवज़ा दिया गया. इस अवैध मुआवज़े वाली ज़मीन के सौदे से बीजेपी के नेतृत्व वाले विपक्ष और कुछ कार्यकर्ताओं ने सिद्धारमैया और उनकी पत्नी पार्वती पर लाभ उठाने का आरोप लगाया गया है. उनका अनुमान है कि कथित अनियमितताएं 4,000 करोड़ रुपये तक की हैं.

क्या है MUDA केस?

साल 1992 में MUDA ने कुछ जमीन रिहायशी इलाके में विकसित करने को किसानों से ले ली थी. उसी प्रक्रिया के तहत कृषि भूमि से अलग किया गया था लेकिन 1998 में अधिगृहित भूमि का एक हिस्सा MUDA ने किसानों को वापस कर दिया. इस तरह से ये जमीन एक बार फिर कृषि जमीन बन गई. यहां तक तो सब ठीक-ठाक चल रहा था. अब विवाद की शुरुआत हुई साल 2004 में जब सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती के भाई बी एम मल्लिकार्जुन ने साल 2004 में इसी जमीन में 3.16 एकड़ जमीन खरीदी. उस दौरान 2004-05 में कर्नाटक में कांग्रेस जेडीएस गठबंधन की सरकार थी और तब सिद्धारमैया डिप्टी सीएम थे. इसी दौरान सामने आया कि इसी जमीन को एक बार फिर से कृषि की भूमि से अलग किया गया लेकिन जब जमीन का मालिकाना हक लेने के लिए सिद्धरमैया फैमिली पहुंची. तब तक वहां लेआउट विकसित हो चुका था.

Rishabh Chhabra
Author: Rishabh Chhabra