दिल्ली के दंगल में केजरीवाल का ‘पंच’ तैयार, क्या होगा कोई बदलाव?

जेल से बाहर आते ही अरविंद केजरीवाल एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं. एक ओर केजरीवाल ने सीएम पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी तो वहीं दूसरी ओर समय से पहले चुनाव कराने की मांग भी उठा दी है. वहीं केजरीवाल की इन ताबड़तोड़ घोषणाओं के बाद राजनीतिक जानकारों का कहना है कि दिल्ली का पूरा चुनाव 5 मुद्दे को लेकर ही होने वाला है. कौन से हैं वो पांच मुद्दे आइए जानते हैं-

पहला मुद्दा: केजरीवाल भ्रष्ट हैं या ईमानदार?

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे का नैरेटिव खुद सेट किया है. 15 सितंबर को आप मुख्यालय में कार्यकर्ताओं से बात करते हुए केजरीवाल ने कहा था कि अगर मैं ईमानदार हूं तो ही मुझे वोट देना, नहीं तो मत देना. दिल्ली की जनता से 2020 में कहा था कि अगर मैंने काम नहीं किया है तो वोट मत देना. इसी तरह मैं अब भी कह रहा हूं कि अगर आपको लगता है कि केजरीवाल ईमानदार नहीं है, तो वोट मत देना. वहीं आम आदमी पार्टी इस सवाल को लेकर दिल्ली में घर-घर जाएगी. आप ने सोशल मीडिया पर ‘केजरीवाल ईमानदार है’ का हैशटैग भी शुरू कर दिया गया है. मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी ने भी केजरीवाल की ईमानदारी पर हमले शुरू कर दिए है. बीजेपी का कहना है कि केजरीवाल को कोर्ट ने क्लीन चिट नहीं मिला है. उन्हें संविधान के अधिकार के तहत जमानत दी गई है.

दूसरा मुद्दा: शिक्षा व्यवस्था

अरविंद केजरीवाल के साथ ही चुनाव होने तक मनीष सिसोदिया ने भी पद नहीं लेने की बात कह दी है. सिसोदिया ने कहा है कि वे जनता की अदालत में जाकर लोगों से पूछेंगे कि क्या अच्छी शिक्षा व्यवस्था देना गुनाह है? अगर नहीं है तो फिर क्यों मुझे 17 महीनों तक जेल में रखा गया? शिक्षा व्यवस्था को मुद्दा बनाकर आप फिर से चुनाव को 2020 के ट्रैक पर ले जाने की कोशिश में है. आप के दावे के अनुसार सिसोदिया के नेतृत्व में दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में कई बदलाव हुए हैं. सिसोदिया ने शिक्षा मंत्री के पद पर रहते हुए उच्च कैटेगरी के स्कूल और यूनिवर्सिटी बनाए हैं. जहां गरीबों के बच्चे भी आसानी से पढ़ सकेंगे.

तीसरा मुद्दा: पानी और फ्री बिजली

रविवार को अपने भाषण के दौरान आप मुख्यालय में अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे का कई बार जिक्र किया. उन्होंने कहा कि केजरीवाल पर कंडीशन लगाने में न तो एलजी और न ही केंद्र ने कोई कसर छोड़ी है लेकिन मैंने आपके काम नहीं रुकने दिए. केजरीवाल रहे या न रहे आप की सरकार में दिल्ली की जनता को फ्री पानी और फ्री बिजली मिलता रहेगा. 2014 के बाद से ही इन दो मुद्दों के सहारे आप दिल्ली की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाए हुए है.

चौथा मुद्दा- एजेंसी की नेताओं पर कार्रवाई

दिल्ली के चुनाव में केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई को भी मुद्दा बनाया जाएगा. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को जमानत देते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी के लिए ‘पिंजरे में बंद तोता’ शब्द का इस्तेमाल किया था. जिसे आप पार्टी लगातार मुद्दा बनाने में जुटी हुई है. हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा था कि नेताओं पर ऐसे-ऐसे मुकदमे लगाए जा रहे हैं. जो कि आतंकियों पर लगाए जाते हैं. हालिया लोकसभा चुनाव में भी आप ने सेंट्रल एजेंसी की कार्रवाई को बड़ा मुद्दा बनाया था.

पांचवां और सबसे बड़ा मुद्दा है जनता से सिंपैथी

सिंपैथी को किसी भी चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा माना जाता है. आम आदमी पार्टी की कोशिश है कि केजरीवाल, सिसोदिया और संजय सिंह को जेल में डालने के मुद्दे को सिंपैथी में बदला जा सके. इस सिंपैथी के जरिए अरविंद केजरीवाल अपने खिलाफ उत्पन्न एंटी इनकंबैंसी को खत्म करना चाहते हैं.

 

Rishabh Chhabra
Author: Rishabh Chhabra