हरियाणा में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. गुरूवार को नामांकन के अंतिम दिन कई उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया. वहीं इस बार हरियाणा के विधानसभा चुनावों की तस्वीर कुछ अलग ही देखने को मिलेगी. जिसके कई कारण हैं. एक तो बीजेपी यहां पर 10 सालों से सत्ता में है. दूसरा कांग्रेस का अकेले विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला. तीसरी वजह कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ आम आदमी पार्टी का मैदान में कूदना. चौथा अंदरुनी कलह के साथ कांग्रेस में टिकट बंटवारे को लेकर कार्यकर्ता और नेताओं के बीच फैली नाराजगी. पांचवां और सबसे अहम हरियाणा की क्षेत्रीय पार्टियां जैसे इनेलो और जेजेपी का इस चुनाव के लिए दमखम लगाना. इन सब के बीच कांग्रेस में बगावत हरियाणा चुनाव के पूरे सीन को पलट सकता है.
बीजेपी के हाथ से सत्ता छीनने की कोशिश में कांग्रेस
दरअसल इस बार के चुनावों को लेकर कांग्रेस को उम्मीद है कि भाजपा को सत्ता से बाहर करने में वह कामयाब रहने वाली है लेकिन जैसे टिकट बंटवारे के बाद कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता एक-एक कर पार्टी छोड़कर इनेलो और आप जैसी पार्टियों का दामन थामते गए. उसने बहुत कुछ साफ कर दिया है. जो कि कांग्रेस के लिए इस चुनाव में अच्छे संकेत नहीं माने जा रहे हैं. हरियाणा चुनाव में कांग्रेस ने कई पूर्व विधायकों व वरिष्ठ नेताओं का टिकट काट दिया है. पार्टी से टिकट कटने के बाद से ही सभी ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. यहीं पर कांग्रेस में खूब खेमेबाजी भी देखने को मिल रही है. ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस तिकड़ी के फेर में फंस गई है. एक तरफ कुमारी शैलजा के समर्थक, दूसरी तरफ भूपेंद्र हुड्डा के समर्थक और तीसरी तरफ रणदीप सिंह सुरजेवाला को चाहने वाले कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता हैं.
कांग्रेस की कलह इनेलो के लिए फायदेमंद
वहीं कांग्रेस पार्टी के कुछ कार्यकर्ता तो दबे स्वरों में यहां तक कहने लगे हैं कि पार्टी की ओर से प्रदेश में कुमारी शैलजा के बढ़ते प्रभाव को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है. जो कि पार्टी के दलित विरोधी स्वभाव को दर्शाता है. जबकि पार्टी लगातार दलितों की हितैषी होने का दावा करती रही है. जिसको लेकर दबी जुबान से ही सही लेकिन हमेशा पार्टी का साथ देने वाले मतदाता भी जिक्र करने लगे हैं. कांग्रेस को हरियाणा की कम से कम 30 सीटों पर इनेलो सीधी टक्कर देकर खेल में बड़ी वापसी करती दिखाई दे रही है. जिसके पीछे की सबसे बड़ी वजह कांग्रेस के अंदर की अतर्कलह ही है. जिसके चलते कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता इनेलो के साथ हो गए हैं. वहीं इनेलो ने भी इनमें से कई को टिकट दे दिया है.
नाराज विधायक निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में
पूर्व विधायक शारदा राठौर ने भी कांग्रेस में बगावत के सुर छेड़ दिया है. शारदा कांग्रेस की टिकट पर पूर्व में बल्लभगढ़ विधानसभा से विधायक रही हैं लेकिन इस बार पार्टी ने शारदा को टिकट नहीं दिया. जिसके चलते शारदा राठौर ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया है. कांग्रेस ने बल्लभगढ़ विधानसभा से पराग शर्मा को टिकट दिया है. वहीं टिकट ना मिलने से नलवा में कांग्रेस नेता संपत सिंह ने भी अपने तेवर दिखा दिए हैं. तो वहीं दूसरी ओर पूर्व मेयर और कांग्रेस नेता उपेन्द्र कौर अहलूवालिया ने भी कांग्रेस के खिलाफ बगावत के सुर छेड़ दिए हैं. कांग्रेस ने उपेन्द्र कौर अहलूवालिया की बजाय चंद्रमोहन को टिकट दिया है. भिवानी के बवानी खेड़ा से कांग्रेस ने प्रदीप नारवाल को मैदान में उतारा है. यहां से पार्टी से टिकट की उम्मीद लगाए मास्टर सतबीर रतेरा को बड़ा झटका लगा है.
कांग्रेस से इस्तीफा देकर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे
तो वहीं अंबाला कैंट से टिकट काटे जाने के बाद पूर्व मंत्री चौधरी निर्मल सिंह की बेटी चित्रा सरवारा ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया. कांग्रेस ने चित्रा को टिकट ना देकर परिमल परी को टिकट दिया है. जबकि पानीपत शहरी सीट से टिकट नहीं मिलने के बाद रोहिता रेवाड़ी ने निर्दलीय के तौर पर नामांकन दाखिल किया है. उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. दूसरी तरफ विजय जैन ने पानीपत ग्रामीण से टिकट ना मिलने पर कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और निर्दलीय के तौर पर मैदान में उतर पड़े हैं.