हरियाणा में इस समय चुनावी माहौल बना हुआ है. सियासत को ‘आयाराम-गयाराम’ मुहावरा देने वाले हरियाणा में चुनावी चकल्लस फिजा में तारी हो गई है. वहीं ऐसे माहौल के बीच ही आधुनिक हरियाणा के निर्माता कहे जाने वाले चौधरी बंसीलाल की 26 अगस्त को जयंती पर चर्चा स्वाभाविक है. हरियाणा की राजनीति वैसे भी तीन ‘लाल’ के इर्द गिर्द ही घूमती रही है. साल 1966 में राज्य गठन के बाद से ही लाल नाम का जबरदस्त बोलबाला रहा है.
तीन बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने बंसीलाल
साल 1927 में हरियाणा के एक हिंदू जाट परिवार में जन्मे चौधरी बंसीलाल का हरियाणा की राजनीति में सिक्का चलता था. 1 नवंबर 1966 को भाषाई आधार पर हरियाणा राज्य का गठन हुआ. हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री पंडित भागवत दयाल शर्मा बने. हालांकि एक साल बाद यानी 1967 में हरियाणा की कमान चौधरी बंसीलाल के पास आ गई. जिसके बाद चौधरी बंसीलाल ने पहली बार हरियाणा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. बंसी लाल के बारे में बताया जाता है कि वह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी के काफी विश्वासपात्र थे. आपातकाल के दौरान बंसी लाल को ही देश के रक्षा मंत्री की जिम्मेवारी सौंपी गई थी. बंसीलाल पर इतना भरोसा था कि 1975 में केंद्र सरकार में बिना पोर्टफोलियो के मंत्री तक बना दिया गया था. वे हरियाणा के तीन बार मुख्यमंत्री रहे.
शराबबंदी और ग्रामीण इलाकों में बिजली पहुंचाने का श्रेय
इतना ही नहीं बंसी लाल को हरियाणा में शराब प्रतिबंधित करने का भी श्रेय जाता है. चौधरी बंसीलाल ने हरियाणा को शराब से मुक्ति दिलाने के लिए यहां शराब पर प्रतिबंध लगाया था. इस मुद्दे को लेकर बंसीलाल विधानसभा चुनाव में गए. इसका फायदा उन्हें बड़ी जीत के रूप में मिला लेकिन बाद में राज्य में शराब की तस्करी बढ़ी और उनकी सरकार गिर गई. इसके अलावा हरियाणा के दूर-दराज के क्षेत्रों में बिजली पहुंचाने का भी श्रेय दिया जाता है. हरियाणा के गांव-गांव तक बंसी लाल के इसी प्रयास के कारण बिजली पहुंच पाई. बंसीलाल सात बार राज्य विधानसभा के लिए चुने गए थे. हालांकि आपातकाल के दौरान बंसीलाल पर कई आरोप भी लगाए गए थे. जिस पर शाह जांच आयोग ने पाया कि लाल अक्सर व्यक्तिगत कारणों से अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया करते थे.
हरियाणा विकास पार्टी की स्थापना की
कांग्रेस से चौधरी बंसीलाल का भी मोहभंग हुआ. जिसके बाद बंसीलाल ने 1996 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग होने के बाद हरियाणा विकास पार्टी की स्थापना की. मगर कांग्रेस से बंसीलाल की दूरी ज्यादा समय तक नहीं रही. वह 2004 में कांग्रेस में वापस लौट आए और 2005 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जिताने में मदद की. 78 साल की उम्र में 28 मार्च 2006 को बंसीलाल का निधन हो गया.