सरकारी कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम की घोषणा सरकार ने कर दी है. वहीं इस स्कीम को लेकर राजनीतिक फैसले की बात को भले ही केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव खारिज कर रहे हों. मगर सत्ताधारी पार्टी बीजेपी इस स्कीम के सहारे एक रूठे हुए वोट बैंक के मान जाने की उम्मीद लगाए बैठी है.
OPS बहाली की मांग चुनावों में कांग्रेस के लिए रही सफल
लोकसभा चुनाव 2024 में OPS की बहाली की मांग को कांग्रेस ने बीजेपी को हराने के लिए राजनीतिक मिसाइल की तरह इस्तेमाल किया था. कांग्रेस के लिए हिमाचल प्रदेश में यह दांव कारगर साबित हुआ. जहां पर परंपरागत रूप से सरकारी कर्मचारी हावी रहे हैं. बीजेपी को इसके चलते मध्य प्रदेश में खास नुकसान नहीं झेलना पड़ा. लोकसभा चुनाव में भी सरकारी कर्मचारियों की पेंशन का मुद्दा भले ही उतना जोरदार न रहा हो लेकिन बीच-बीच में इसकी गूंज पार्टी के कानों तक जरूर पहुंचती थी. राजनीतिक विश्लेषक तो ये मानकर बैठ गए थे कि हालिया नतीजों के बाद आगामी चुनावों में OPS पर बीजेपी को सियासी नुकसान झेलना पड़ सकता है. करीब 18 महीनों की मंत्रणा के बाद यूनिफाइड पेंशन स्कीम को लागू करने का फैसला किया गया. एनडीए सरकार ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया है जब हरियाणा, जम्मू और कश्मीर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. साथ ही महाराष्ट्र और झारखंड में भी इसी साल चुनाव प्रस्तावित हैं.
जीत के बाद कांग्रेस ने योजना से काटी कन्नी
विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने OPS का झंडा खूब बुलंद किया लेकिन राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ में धूल फांकने के बाद इस मुद्दे से कांग्रेस ने तौबा कर ली. यहां तक कि लोकसभा चुनाव 2024 के घोषणापत्र में पार्टी ने OPS का जिक्र तक नहीं किया. जब केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव UPS पर कैबिनेट के फैसले के बारे में बता रहे थे तो उन्होंने कांग्रेस पर इस बारे में तंज भी कसा. वैष्णव ने बताया कि कैसे कांग्रेस ने हिमाचल और राजस्थान में इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया, लेकिन पार्टी ने कभी भी OPS को लागू नहीं किया. वैष्णव ने कहा कि ‘कांग्रेस हमेशा कर्मचारियों के प्रति असंवेदनशील रही है. जो कि हिमाचल और राजस्थान में परिलक्षित होता नजर आया है. पार्टी ने दोनों राज्यों में वादे किए, लेकिन OPS को लागू करने में विफल रही… भ्रम पैदा करने की उनकी राजनीति एक बार फिर उजागर हुई.’ केंद्रीय मंत्री के मुताबिक UPS प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सोच-विचार के बाद लाई गई योजना है क्योंकि यह पूरी तरह से राज्य द्वारा वित्तपोषित है। साथ ही अंतर-पीढ़ी समानता का वादा करती है.