कोलकाता रेप केस को लेकर पूरे देश में आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है. इस घटना के बाद से जहां एक ओर अपनी सुरक्षा की पुरजोर मांग उठ रहे हैं तो वहीं पीड़िता को इंसाफ दिलाने की आवाज भी बुलंद स्वरों में उठाई जा रही है. वहीं इन सबके बीच मंगलवार को मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से 22 अगस्त तक रिपोर्ट तलब करने को कहा है. जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी. इस मामले का चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्वत: संज्ञान लिया है. सुप्रीम कोर्ट की बेंच में सीजेआई के अलावा जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं. सीबीआई की ओर से सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए. वहीं बंगाल डॉक्टर्स संघ समेत अन्य याचिकाकर्ता के वकील भी पेश हुए.
कोलकाता कांड देश के डॉक्टरों की सुरक्षा का मसला- कोर्ट
मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि मैं सुप्रीम कोर्ट की इस मामले में सहायता करूंगा. सीजेआई ने कहा कि हमने यह स्वत: संज्ञान इसलिए लिया है कि ये सिर्फ कोलकाता का एक भयावाह मामला नहीं है. बल्कि देश के डॉक्टरों की सुरक्षा का मसला है. खासतौर पर महिला डॉक्टरों की सुरक्षा और वर्किंग ऑवर का मसला है. नर्सिंग स्टाफ इस पर एक राष्ट्रीय सहमति बननी चाहिए कि महिलाओं की सुरक्षा हो. उन्हें संविधान में समानता मिली है. यह सिर्फ इसलिए नहीं कि रेप का मसला है. यह बहुत ही चिंताजनक बात है और पीड़िता का नाम पूरी मीडिया में आ गया. तस्वीरें दिखा दी गई, यह चिंताजनक है. हमारा फैसला है कि रेप पीड़िता का नाम तक नहीं सार्वजनिक किया जाना है और यहां तस्वीरें तक दिखा दी गईं हैं.
सीबीआई से सुप्रीम कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट की तलब
सीजेआई ने पश्चिम बंगाल की ओर से पेश हुए कपिल सिब्बल से कुछ सवाल किए हैं. सिब्बल ने बताया कि यह मर्डर का मामला है. उन्होंने कहा कि मैं सभी तथ्य स्पष्ट कर दूंगा. सीजेआई ने कहा कि एफआईआर में मर्डर स्पष्ट नहीं हो रहा है. सिब्बल ने कहा नहीं ऐसा नहीं है. सीजेआई ने कहा कि इतना भयानक अपराध हुआ और क्राइम सीन को संरक्षित नहीं किया गया. पुलिस क्या कर रही थी? एसजी ने कहा कि सेक्सुअल पर्वर्ट पूरी तरह से जानवर जैसा था और पुलिस विफल रही है. सीजेआई ने कहा कि हम सीबीआई से स्टेटस रिपोर्ट तलब करते हैं और एक नेशनल टास्क फोर्स बनाई जाए, जो देशभर के चिकित्सकों की सुरक्षा पर अपने सुझाव दे. हम पूरे मामले पर निगरानी करेंगे. सीजेआई ने पूछा कि पीड़िता के शव को अंतिम संस्कार के लिए किस समय सौंपा गया. जिस पर कपिल सिब्बल ने जवाब देते हुए कहा कि पीड़िता का शव रात 8:30 बजे सौंपा गया था. सीजेआई ने सवाल करते हुए कहा कि शव सौंपने के 3 घंटे बाद एफआईआर दर्ज की गई, यह क्यों हुआ?
एसजी को बहुत सारी गलतफहमियां हैं- कपिल सिब्बल
एसजी ने कहा कि मैं इस मामले को राजनीति से दूर रखना चाहता हूं, ताकि राज्य सरकार डिनायल मोड में ना रहे. पूरे राज्य में कानून व्यवस्था के हालात खराब हैं. बंगाल सरकार का पक्ष रख रहे कपिल सिब्बल ने कहा कि एसजी कहते हैं कि वह मामले को राजनीतिक रंग से दूर रखना चाहते हैं और खुद ऐसी दलील दे रहे हैं. एसजी को बहुत सारी गलतफहमियां हैं. मीडिया में बहुत कुछ ऐसा है जिसको स्पष्ट करने की जरूरत है. सीजेआई ने कहा कि राज्य में इतने प्रदर्शन हो रहे हैं, डॉक्टर्स, सिविल सोसायटी, वकील सभी ने इस मामले में रोष व्यक्त किया है. आप धैर्य रखें. हम चाहते हैं कि व्यवस्था बेहतर हो. सिब्बल ने कहा कि कॉलर बोन नहीं टूटा है.
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन भी बना पक्षकार
वहीं दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान मामले में उसे भी पक्षकार बनाने की अपील की थी. जबकि फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने अपने वकीलों के जरिए सुप्रीम कोर्ट में स्वत: संज्ञान जनहित याचिका में इंटरवेंशन एप्लीकेशन दायर किया है.
SIT का बंगाल सरकार ने किया गठन
इधर पश्चिम बंगाल सरकार ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए आईपीएस डॉक्टर प्रणव कुमार के अगुवाई में एक SIT का गठन किया है. पूर्व प्रिंसिपल डॉक्टर संदीप घोष के खिलाफ आरोप सामने आने के बाद इसका गठन किया गया है. टीम में मुर्शिदाबाद रेंज के डीआईजी वकार रजा, सीआईडी के डीआईजी सोमा दास मित्रा और कोलकाता पुलिस की डीसीपी इंदिरा मुखर्जी भी शामिल होंगी.