चुनाव आयोग ने जम्मू कश्मीर में चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है. चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि जम्मू-कश्मीर में 90 निर्वाचन क्षेत्र हैं जिसमें से 74 जनरल, 9 ST और 7 SC हैं. मतदाताओं की संख्या कुल 87.09 लाख है. जिसमें 44.46 लाख पुरुष और 42.62 लाख महिला मतदाता होंगे. जबकि युवा मतदाताओं की संख्या 20 लाख है. उन्होंने आगे कहा कि तीसरे जून को वादा किया था कि चुनाव की अवधि कम होगी. इसके तहत ही जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव तीन चरणों में होंगे. लोकसभा चुनाव पांच चरणों में हुआ था. 20 अगस्त को पहली अधिसूचना जारी होगी. 24 सीटों पर 18 सितंबर को पहले चरण का चुनाव, 26 सीटों पर 25 सितंबर को दूसरे चरण का चुनाव और 40 सीटों पर 1 अक्टूबर को तीसरे चरण का मतदान होगा. 4 अक्टूबर को मतगणना होगी.
करीब 360 होंगे मॉडल पोलिंग स्टेशन
चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि चुनाव के लिए गजट नोटिफिकेशन पहले चरण के लिए 20 अगस्त को होगा. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 27 अगस्त, नामांकन की जांच 28 अगस्त, नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 30 अगस्त है, जबकि मतदान 18 सितंबर को होंगे. दूसरे चरण के लिए अधिसूचना 29 अगस्त को जारी होगी. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 5 सितंबर होगी. 28 अगस्त को नामांकन की जांच होगी. इस बार मॉडल पोलिंग स्टेशन करीब 360 होंगे. बता दें कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद ये पहला विधानसभा चुनाव होगा. घाटी से 5 अगस्त 2019 को 370 को हटाया गया था. 10 साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव कई मायनों में खास होने वाले हैं. साल 2014 में जब आखिरी बार जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव हुए थे, तब से अब तक काफी कुछ बदल गया है. पहले के मुकाबले अब सीटों की संख्या भी बढ़ गई है. जहां पहले चुनी हुई सरकार ही सबकुछ होती थी वहीं अब ज्यादातर शक्तियां उपराज्यपाल के पास होंगी.
फोर्स से ज्यादा जरूरी आवाम का विश्वास- चुनाव आयुक्त
चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि सभी पोलिंग स्टेशन पर सीसीटीवी की व्यवस्था की गयी है. चुनावकर्मियों को निष्पक्ष रहने के स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं. पक्षपात की शिकायत पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. पर्यवेक्षक अपना फोन नंबर समाचार पत्र में प्रकाशित करें. साथ ही बताया कि फेक न्यूज और फेक वीडियो को लेकर सतर्क किया गया हैं. जम्मू कश्मीर में दलों को यह आश्वास्त किया गया है कि सभी को समान सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी. सभी उम्मीदवारों को सुरक्षा मिलेगी. चुनाव के दौरान पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी लेकिन फोर्स से ज्यादा जरूरी वहां की आवाम का विश्वास है. लोकतंत्र के उत्सव को आगे बढ़ाने की ललक देखकर आए हैं, लोग उसका जवाब देंगे. उन्होंने उम्मीदवारों को सुरक्षा को लेकर जो खतरे हैं. वे पूरी तरह से उन लोगों की राडार पर हैं और उनका ख्याल रखा जा रहा है. 2024 के लोकसभा चुनाव में जो बुनियाद रखी गयी उसकी इमारत उससे भी बुलंद होगी.
10 सालों में जम्मू- कश्मीर में क्या-क्या बदला?
5 अगस्त 2019 को जब धारा 370 हटाई गई उसके बाद ही जम्मू-कश्मीर काफी बदल गया था. इसके बाद जम्मू-कश्मीर दो हिस्सों में बंट गया. पहला- जम्मू-कश्मीर और दूसरा- लद्दाख. दोनों ही अब केंद्र शासित प्रदेश हैं. जम्मू-कश्मीर में विधानसभा भी है, जबकि लद्दाख में ऐसा नहीं है. हालांकि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा भले है लेकिन यहां अब सरकार पहले जैसी नहीं रही. 10 साल पहले तक जम्मू-कश्मीर में चुनी हुई सरकार ही सबकुछ हुआ करती थी लेकिन अब उपराज्यपाल सबसे ऊपर होंगे. उपराज्यपाल का पुलिस, जमीन और पब्लिक ऑर्डर पर अधिकार होगा. वहीं जनता द्वारा चुनी गई सरकार को बाकी सभी मामलों पर फैसला करने का अधिकार होगा. हालांकि उपराज्यपाल की मंजूरी जरूरी होगी.
कहां और कितनी बढ़ गईं सीटें?
10 साल पहले जम्मू-कश्मीर में कुल 111 सीटें थीं. इनमें से जम्मू में 37 सीटें, कश्मीर में 46 सीटें और लद्दाख में 4 सीटें थीं. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 24 सीटें थीं. वहीं अब जम्मू में अब 43 तो कश्मीर में 47 सीटें होंगी. वहीं पीओके के लिए 24 सीटें ही रिजर्व हैं. यहां चुनाव नहीं कराए जा सकते. जबकि लद्दाख में विधानसभा ही नहीं है. इस तरह से कुल मिलाकर 114 सीटें हैं. जिनमें से 90 पर चुनाव कराए जाएंगे. वहीं जम्मू रीजन की बात करें तो यहां पर सांबा, कठुआ, राजौरी, किश्तवाड़, डोडा और उधमपुर में एक-एक सीट बढ़ा दी गई है. वहीं कश्मीर के रीजन में कुपवाड़ा जिले में एक सीट बढ़ाई गई है. जम्मू के सांबा में रामगढ़, कठुआ में जसरोता, राजौरी में थन्नामंडी, किश्तवाड़ में पड्डेर-नागसेनी, डोडा में डोडा पश्चिम और उधमपुर में रामनगर सीट जोड़ी गई हैं. वहीं कश्मीर रीजन में कुपवाड़ा जिले में ही एक सीट बढ़ी हैं. कुपवाड़ा में त्रेहगाम नई सीट होगी. अब कुपवाड़ा में 5 की बजाय 6 सीटें हो गई हैं.
कश्मीरी पंडितों के लिए दो सीटें रिजर्व
इस बार कश्मीरी पंडितों के लिए दो सीटें रिजर्व रखी गई हैं. हालांकि इन्हें कश्मीरी प्रवासी कहा गया है. उपराज्यपाल अब विधानसभा के लिए 3 सदस्यों को नामित कर सकेंगे. वहीं इन तीन सदस्यों में से दो कश्मीरी प्रवासी और एक पीओके से विस्थापित व्यक्ति होगा. इसके अलावा जिन दो कश्मीरी प्रवासियों को नामित किया जाएगा उनमें से एक महिला होगी. वहीं कश्मीरी प्रवासी उसे माना जाएगा जो 1 नवंबर 1989 के बाद घाटी या जम्मू-कश्मीर के किसी भी हिस्से से पलायन किया हो. साथ ही उसका नाम रिलीफ कमीशन में रजिस्टर हो. वहीं जो व्यक्ति 1947-48, 1965 या 1971 के बाद पीओके से आया होगा. उसे विस्थापित माना जाएगा. इस हिसाब से जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल मिलाकर 93 सीटें होंगी लेकिन चुनाव 90 सीटों पर ही होंगे. ये पुडुचेरी वाला फॉर्मूला ही है. इसके साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए 16 सीटें रिजर्व की गई हैं. जिनमें एससी के लिए 7 और एसटी के लिए 9 सीटें हैं.
जम्मू-कश्मीर की सियासत में भी हुए काफी बदलाव
10 साल बाद अब जम्मू-कश्मीर की सियासत में भी काफी बदलाव हुए हैं. पुराने जम्मू-कश्मीर में जम्मू में 37 और कश्मीर में 46 सीटें होती थीं. लिहाजा कश्मीर में बेहतर प्रदर्शन करने के बाद सरकार बनाना आसान हो जाता था लेकिन अब जम्मू में 43 और कश्मीर में 47 सीटें होंगी. इससे अब पार्टियों को सिर्फ कश्मीर ही नहीं, बल्कि जम्मू में भी ज्यादा सीटें जीतना जरूरी हो गया है. जहां जम्मू हिंदू बहुल तो वहीं कश्मीर मुस्लिम बहुल इलाका माना जाता है. वहीं जम्मू में 6 सीटें बढ़ने से बीजेपी को फायदा मिलने की उम्मीद है. 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जम्मू की 37 में से 25 सीटें जीती थीं. हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी जम्मू की दो सीटों-जम्मू और उधमपुर को जीतने में कामयाब रही है. इसके अलावा पिछले चुनाव में भी बीजेपी ही जम्मू और उधमपुर सीट पर चुनाव जीतने में कामयाब रही थी.
कश्मीर में विधानसभा चुनाव होंगे काफी दिलचस्प
साल 2024 में कश्मीर में होने वाले विधानसभा चुनाव काफी दिलचस्प होने वाले हैं. जिसका कारण है कि यहां के लोग 370 हटाए जाने से नाराज हैं. लोकसभा चुनावों के दौरान बीजेपी का कश्मीर में चुनाव न लड़ना इसी नाराजगी से जोड़ गया था. बीजेपी ने देशभर में कश्मीर से 370 हटाने के फैसले का खूब प्रचार किया. साथ ही इसे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया मगर उसी कश्मीर से वो चुनावी मैदान से बाहर रही. ऐसी चर्चाएं हैं कश्मीर में कुछ छोटी-छोटी पार्टियां उभरकर सामने आई हैं. इन छोटी-छोटी पार्टियों में ‘पीपुल्स कॉन्फ्रेंस’ और अल्ताफ बुखारी की ‘जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी’ भी शामिल हैं. दावा बताते हैं कि इन पार्टियों का बीजेपी समर्थन करती है. कश्मीर में वोट काटने और सरकार बनाने के लिए बीजेपी का इन पार्टियों का समर्थन करना जरूरी भी है.
10 साल पहले क्या थे विधानसभा चुनाव के नतीजे?
10 साल पहले साल 2014 में जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव हुए थे. तब जम्मू-कश्मीर की 87 सीटों में से पीडीपी ने 28 सीटें, बीजेपी ने 25 सीटें, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 15 सीटें और कांग्रेस ने 12 सीटें जीती थीं. बीजेपी और पीडीपी ने मिलकर सरकार बनाई और मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री बने. मुफ्ती मोहम्मद सईद का निधन जनवरी 2016 में हो गया और करीब चार महीने तक राज्यपाल शासन लागू रहा. बाद में उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री बनीं लेकिन ये गठबंधन ज्यादा दिन तक नहीं चला. बीजेपी ने 19 जून 2018 को पीडीपी से गठबंधन तोड़ लिया. राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया. अभी वहां राष्ट्रपति शासन लागू है. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल आर्टिकल-370 को हटाने के फैसले को बरकरार रखते हुए केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर में 30 सितंबर 2024 तक विधानसभा चुनाव कराने का आदेश दिया है.