संसद का ये मानसून सत्र काफी अहम होने वाला है. दरअसल मोदी सरकार इस मानसून सत्र में एक ऐसा विधेयक पेश करने वाली है. जो कि वक्फ बोर्ड से जुड़ा है. मोदी सरकार संसद के मानसून सत्र के दौरान वक्फ अधिनियम में बड़ा बदलाव करने वाली है. कैबिनेट बैठक में शुक्रवार को वक्फ अधिनियम में 40 संशोधनों के प्रस्ताव पर मुहर लग गई है. जानकारों की मानें तो ये विधेयक पारित होने के बाद वक्फ बोर्ड के अधिकार और शक्तियों में कटौती हो जाएगी. वक्फ बोर्ड किसी भी सम्पत्ति पर बिना सत्यापन के दावा नहीं कर सकेगा. राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार रेलवे और भारतीय सेना के बाद देश में सबसे ज्यादा जमीन वक्फ बोर्ड के पास है.
देश में वर्तमान में 32 राज्य और एक सेंट्रल वक्फ बोर्ड
वक्फ शब्द अरबी भाषा से लिया गया है. जिसका मतलब है समर्पण करना या रोकना. इस मामले में वक्फ का मतलब है कि जमीन-जायदाद या ट्रस्ट से आम इंसान का कल्याण करने से है. वक्फ शब्द का इस्तेमाल उस जायदाद के लिए किया जाता है जो इस्लाम में आस्था रखने वाले दान करते हैं. यह सम्पत्ति वक्फ बोर्ड के तहत आती है. जो कि चल और अचल दोनों तरह की हो सकती है. वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष का पद केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री के पास होता है. वर्तमान समय में 32 राज्य और एक सेंट्रल वक्फ बोर्ड हैं. हर स्टेट वक्फ बोर्ड के पास अपनी जमीन है.
यूपी के वक्फ बोर्ड के पास सबसे ज्यादा सम्पत्ति
वक्फ की सम्पत्ति का ठीक से रखरखाव करने और धार्मिक कार्यों में इस्तेमाल करने के लिए स्थानीय स्तर पर कई बॉडीज बनाई गई हैं. जिन्हें वक्फ बोर्ड कहते हैं. हर स्टेट में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड मौजूद हैं. यही बोर्ड उन सम्पत्ति की देखभाल का काम करते हैं. इनका मकसद इन सम्पत्ति के जरिए गरीब और जरूरतमंदों की मदद करना होता है. मस्जिद समेत कई धार्मिक निर्माण कराना, शिक्षा के लिए व्यवस्था करने के साथ ही धार्मिक कार्यों के लिए मदद करना भी होता है. केंद्र सरकार की तरफ से जारी किए गए आंकड़े बताते हैं सबसे ज्यादा सम्पत्ति उत्तर प्रदेश के वक्फ बोर्ड के पास है. जहां यूपी में सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास 1,99,701 और यूपी के शिया वक्फ बोर्ड के पास 15006 प्रॉपर्टी हैं.
32 राज्यों में वक्फ बोर्ड की कुल 7,85,934 संपत्तियां
यूपी के अलावा अन्य राज्यों की बात करें तो ऐसे 32 राज्य हैं जिनमें वक्फ बोर्ड की संपत्तियां 100 के आंकड़ें के पार हैं. अंडमान एवं निकोबार द्वीप में 150 संपत्तियां,आंध्र प्रदेश में 10708 संपत्तियां, असम में 1616 संपत्तियां, बिहार (शिया) में 1672 संपत्तियां, बिहार (सुन्नी) में 6480 संपत्तियां, चंडीगढ़ में 34, छत्तीसगढ़ में 2665, दादरा और नगर हवेली में 32, दिल्ली में 1047, गुजरात में 30881, हरियाणा में 23117, हिमाचल प्रदेश में 4494, झारखंड में 435, जम्मू और कश्मीर में 32506, कर्नाटक में 58578, केरल में 49019, लक्षद्वीप में 896, मध्य प्रदेश में 31342, महाराष्ट्र में 31716, मणिपुर में 966, मेघालय में 58, ओडिशा में 8510,पुदुचेरी में 693, पंजाब में 58608, राजस्थान में 24774, तमिलनाडु में 60223, त्रिपुरा में 2643, तेलंगाना में 41567, उत्तर प्रदेश(सुन्नी) में 199701, उत्तर प्रदेश(शिया) में 15006, उत्तराखंड में 5317, पश्चिम बंगाल में 80480 संपत्तियां वक्फ बोर्ड के कब्जे में हैं यानी कि कुल 7,85,934 संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड का कब्जा है.
वक्फ बोर्ड की सम्पत्ति की अनुमानित कीमत 1.2 लाख करोड़ रुपये
भारत के वक्फ के पास सबसे ज्यादा संपत्तियां है. दुनिया के किसी भी देश में वक्फ बोर्ड के पास इतनी शक्तियां नहीं हैं,जितनी भारत में दी गई हैं. 2022 के आंकड़ों के अनुसार भारत में वक्फ बोर्ड के पास करीब 7.87 लाख संपत्तियां हैं. वहीं वर्तमान के आंकड़ों की बात करें, तो वर्तमान में वक्फ बोर्डों के पास करीब 9 लाख 40 हजार एकड़ में फैली करीब 8 लाख 72 हजार 321 अचल संपत्तियां हैं. चल संपत्ति 16,713 हैं. जिनकी अनुमानित कीमत 1.2 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है.
बोर्ड में कौन शामिल होगा ये राज्य सरकार करती है तय
वक्फ बोर्ड में कई पदों पर तैनाती होती है. बोर्ड में सर्वे कमिश्नर होता है जो कि संपत्तियों का लेखा-जोखा रखता है. इसके अलावा बोर्ड में मुस्लिम IAS अधिकारी, मुस्लिम विधायक, मुस्लिम सांसद, मुस्लिम टाउन प्लानर, मुस्लिम वकील और मुस्लिम बुद्धिजीवियों को शामिल किया जाता है. बोर्ड में कई प्रशासनिक अधिकारी भी होते हैं. वक्फ ट्रिब्यूनल में कौन-कौन शामिल होगा यह राज्य सरकार द्वारा ही तय किया जाता है. राज्य सरकारें इस बात पर ज्यादा ध्यान होता है कि बोर्ड में ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम सदस्य शामिल हों.