सामने आया अखिलेश का 2027 को लेकर मेगा प्लान, PDA पर नहीं बल्कि PDA+ फॉर्मूले से कर ली ये बड़ी तैयारी

लोकसभा चुनाव 2024 में यूपी में अखिलेश के फॉर्मूले ने बीजेपी को मात दे दी. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक यानी PDA का फॉर्मूला लोकसभा चुनाव में हिट हो गया. लोकसभा चुनावों में बीजेपी को टक्कर देने के बाद अब अखिलेश दिल्ली पहुंच गए है और सांसद के रूप में सदन की कार्रवाईयों में हिस्सा ले रहे हैं. साथ ही सरकार को जोरदार टक्कर भी दे रहे हैं. तो वहीं दूसरी ओर अखिलेश अपने PDA फॉमूले का विस्तार करने की तैयारी में नजर आ रहे हैं. अब अखिलेश यादव PDA में ब्राह्मण समाज को भी जोड़ने लगे हैं. हाल ही में सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा की गई नियुक्तियों के कई मायने निकलकर सामने आ रहे हैं.

विधानसभा के नेता विपक्ष की नियुक्ति ने सबको चौंकाया

सबसे पहले विधानसभा में अखिलेश यादव ने नेता विपक्ष को लेकर जो नियुक्ति की. सपा प्रमुख की इस नियुक्ति ने हर किसी को हैरत में डाल दिया. उन्होंने नेता विपक्ष के तौर पर माता प्रसाद पांडे को चुना. माता प्रसाद ब्राह्मण समाज से आते हैं और पुराने समाजवादी है वे दिवंगत मुलायम सिंह यादव के नजदीकी और संस्थापक सदस्यों में से एक हैं. इसके साथ ही कई बार के विधायक और मंत्री भी रहे हैं. वहीं सपा सरकार में विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. अखिलेश ने विधानसभा में ही दूसरी नियुक्तियों में मुस्लिम समाज से आने वाले महबूब अली को मुख्य सचेतक और कमाल अख्तर को उपमुख्य सचेतक बनाया और अपने मुस्लिम वोट बैंक को मैसेज दिया. वहीं कुर्मी समाज से आने वाले आरके वर्मा को उपसचेतक और मोहम्मद जसमेर अंसारी को विधायक दल का उपनेता बनाया. बता दें कि 2022 में अखिलेश ने करहल सीट से विधानसभा चुनाव जीता था और नेता विपक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. हाल ही में उन्होंने कन्नौज सीट से आम चुनाव लड़ा और जीत के बाद विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी.

नियुक्तियों में साफ दिख रही PDA प्लस की तस्वीर

यादव वोट बैंक को संतुष्ट करने के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लाल बिहारी यादव को विधान परिषद में सदन का नेता बनाया. तो किरण पाल कश्यप को मुख्य सचेतक और कायस्थ समाज से आने वाले आशुतोष सिंह को सचेतक का पद दे दिया. मतलब साफ है कि विधानसभा और विधान परिषद में अखिलेश ने जातियों का एक गुलदस्ता तैयार किया. जिसमें उनके पीडीए प्लस की तस्वीर साफ दिखाई दी. पीडीए से आगे बढ़कर ब्राह्मण और कायस्थ को जोड़ने की अखिलेश ने भरपूर कोशिश की है. ये दोनों जातियां बीजेपी का वोट बैंक मानी जाती हैं. वहीं अब अखिलेश भी इन दोनों जातियों को अपनी ओर खींचने की कोशिश में लग गए हैं.

पीडीए के फॉर्मूले को आगे बढ़ाने की जीतोड़ कवायद

अखिलेश यादव जब संसद पहुंचे तो अपने साथ हाथों में हाथ डालकर फैजाबाद से सांसद अवधेश प्रसाद को संसद भवन ले गए. अवधेश अब हमेशा अखिलेश के बगल में आगे की पंक्ति में बैठे दिखाई देते हैं. इससे पासी बिरादरी को अखिलेश ने संदेश दिया. यह वो दलित समुदाय है, जो पिछले एक दशक से ज्यादातर समय से बीजेपी के साथ रहा है लेकिन अब अखिलेश दलितों में पासी बिरादरी को सीधा संदेश भेज रहे हैं. वहीं बात करें कुशवाहा या मौर्य बिरादरी की तो इन दोनों जातियों पर पहले बसपा की मजबूत पकड़ रही है. बाद में ये दोनों समाज मायावती से छिटककर बीजेपी में शिफ्ट हो गया, लेकिन अब कुशवाहा बिरादरी के बड़े चेहरे बाबू सिंह कुशवाहा के जौनपुर से सांसद बनने के बाद अखिलेश यादव ने उन्हें लोकसभा में सदन का उपनेता बनाया दिया है. मतलब साफ है कि संसद में अखिलेश के बाद उनका नंबर दूसरा होगा. आजमगढ़ सांसद और अपने भाई धर्मेंद्र यादव को लोकसभा में मुख्य सचेतक बना दिया है. जबकि अवधेश प्रसाद को अधिष्ठाता मंडल का सदस्य बनाया गया है. कुल मिलाकर अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के भीतर विधान मंडल और संसद में जो नियुक्तियां की हैं, यह उनके पीडीए के फॉर्मूले को आगे बढ़ाने की कवायद दिखाई दे रही है.

क्या है अखिलेश का पीडीए प्लस का नया फॉर्मूला?

अखिलेश पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यकों के बाद अब अगड़ी जातियों को भी साधते हुए दिखाई दे रहे हैं और उनके प्लान में ब्राह्मण वोट बैंक भी है. यूपी में ब्राह्मण समाज के बारे में माना जा रहा है कि वो धीरे-धीरे ब्राह्मण समाज बीजेपी से नाराज हो रहा है. ऐसे में अखिलेश कांग्रेस को साथ लेने के बाद अब ब्राह्मण बिरादरी को साधने में जुट गए हैं.अखिलेश का मानना है कि 2027 में अगर पीडीए से आगे बढ़कर उन्होंने इन बिरादरियों को साध लिया. तो उनके लिए जीत का फॉर्मूला आसान हो जाएगा.

Rishabh Chhabra
Author: Rishabh Chhabra