आजकल बाजारों में सब कुछ रेडीमेड मिल जाता है. फिर वो तेल मसाले हों या खाने का सामान. वहीं जब बाजार में रुपये खर्च करके आसानी से सबकुछ मिल ही जाता है तो लोगों ने भी पुराने जमाने की घरेलू चीजों को छोड़ रेडीमेड का दामन थाम लिया है. मगर अब इसका सीधा असर आपकी सेहत पर पड़ने वाला है. दरअसल कानपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है. जिसका सीधा संबंध आपकी रसोई से है. यहां कई नामी कंपनियों के सब्जी मसालों में कीटनाशक और जानलेवा बैक्टीरिया के मिलने का मामला सामने आया है. जो कि आपकी सेहत के लिए काफी नुकसानदेह हैं. इस मामले में डॉक्टरों की मानें तो खाने-पीने की चीजों से लेकर मसालों तक में कीटनाशक होना काफी घातक है. इससे लोगों के शरीर पर बुरा असर पड़ सकता है. इनके नियमित और लंबे वक्त तक सेवन करने से कैंसर जैसी बीमारियां तक हो सकती है.
ब्रॉडेड कंपनियों के मसाले जांच में अनसेफ
कानपुर के असिस्टेंट फूड कमिश्नर सेकेंड संजय प्रताप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि दो नामी कंपनियों MDH और एवरेस्ट मसालों के नमूने फेल होने के बाद सरकार के निर्देश पर सैंपल लिए गए थे. जिसके बाद जांच में अशोक और गोल्डी जैसे 14 कंपिनयों के 23 नमूने फेल हो गए. मसालों में मिले कीटनाशक और माइक्रोबैक्टीरिया लोगों की सेहत और जीवन के लिए बेहद घातक हैं. जिसके बाद कंपनी प्रबंधन को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है. संतोषजनक जवाब न मिलने पर FIR दर्ज किया जाएगा. साथ ही ADM सिटी कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा. इसके बाद जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी.
लंबे समय से मिल रही शिकायतो पर लिया गया एक्शन
मिली जानकारी के अनुसार कानपुर में काफी लंबे समय से सब्जी मसालों में गड़बड़ी की शिकायत आ रही थी. जिसके बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम ने इस मामले को गंभीरता से लिया और 2 मई को शहर भर के मसाला प्रतिष्ठानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की. टीम की इस छापेमारी में 33 सैंपल जांच के लिए लाए गए. इन सभी सैंपलों को गहन जांच के लिए हरियाणा की लैब में भेजा गया. जब मसालों की जांच रिपोर्ट सामने आई तो आंकड़े चौंकाने वाले थे. जांच के लिए भेजे गए 33 सैंपलों में से 23 सैंपल अनसेफ थे. इतना ही नहीं मसालों के 16 सैंपल ऐसे पाए गए जिनमें घातक कीटनाशक और माइक्रो बैक्टीरिया पाए गए. मतलब साफ है कि 70 फीसदी मसाले लोगों की सेहत के लिए खतरनाक हैं.
सैंपल में मिले घातक कार्बेडाजिम और प्रोपरगाइट
सैंपलों की जांच रिपोर्ट की माने तो मसालों में कार्बेडाजिम और प्रोपरगाइट भारी मात्रा में पाया गया है. इन दोनों का इस्तेमाल मसालों में फफूंदी को रोकने और लंबे समय तक चलाने के लिए किया जाता है. आमतौर पर लोग कार्बेडाजिम और प्रोपरगाइट का इस्तेमाल नहीं करते हैं. जहां प्रोपरगाइट एक एराकिसाइड है जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से खेतों में कीड़ों से फसल की रक्षा करने के लिए और विशेष रूप से मकड़ी से फसलों की रक्षा के लिए किया जाता है. वहीं कार्बेडाजिम एक फंगीसाइड है. जिसका इस्तेमाल मसाले में होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए और फंफूदी नियंत्रण के लिए किया जाता है. जबकि आम लोग कार्बेडाजिम का प्रयोग नहीं कर सकते हैं क्योंकि इसके इस्तेमाल से सेहत पर कई गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं. इसके सेवन से दिल और गुर्दे पर खतरनाक असर पड़ता है. बांझपन और अन्य प्रजनन समस्याएं भी होने की संभावना रहती है. प्रोपरगाइट के सेवन से त्वचा और आंखों में जलन हो सकती है. वहीं अगर इसका ज्यादा इस्तेमाल किया जाए तो इंटरनल जलन और अन्य बीमारियां सामने आ सकती हैं. इस प्रकार के मसाले के अधिक सेवन से सांस लेने में दिक्कत आ सकती है. इससे खांसी, गले में खराश और सांस लेने में दिक्कत, लिंफोमा और अन्य प्रकार के कैंसर तक हो सकते हैं. प्रजनन क्षमता में कमी और जन्मदोष का जोखिम भी इसके सामान्य उपयोग से हो सकता है.