अखिलेश ने क्यों लगाई पुराने सपाइयों की पार्टी में नोएंट्री, सामने आई ये बड़ी वजह

सपा प्रमुख अखिलेश यादव दो साल के ब्रेक के बाद एक बार फिर दिल्ली की राजनीति में सक्रिय रूप से नजर आ रहे हैं. साथ ही लोकसभा चुनावों में मिली जीत ने उनके हौसले को और भी बढ़ा दिया है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव लोकसभा चुनावों में मिली जीत को साल 2027 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों में दोहराने की जुगत में लगे हुए हैं. इसके लिए उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेताओं को कड़ी चेतावनी दे दी है.

बीजेपी नेताओं से दूर रहने की दी चेतावनी

अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के नेताओं को बीजेपी नेताओं से दूर रहने की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि जो भी बीजेपी नेताओं को समाजवादी पार्टी में लेने की पैरवी करेगा, उसे वो बाहर कर देंगे. ऐसा कहकर अखिलेश एक तीर से दो निशाने कर रहे हैं. एक तो वे ऐसा इसलिए कह रहे हैं ताकि उनका माहौल बना रहे. साथ ही वो लोगों को ये बताना चाहते हैं कि बीजेपी में भगदड़ मची है. बीजेपी में सब अपने लिए बेहतर रास्ते तलाश रहे हैं. इस बीच उनके लिए चुनौती लोकसभा चुनाव वाले नतीजों को विधानसभा चुनाव में दोहराने की है. यूपी विधानसभा चुनाव साल 2027 की शुरुआत में होने हैं. तब तक समाजवादी पार्टी का माहौल टाइट कैसे रहे, इसीलिए अखिलेश ने चेतावनी वाला ये दांव चल दिया है.

लोकसभा चुनावों की जीत के बाद सपा कैंप का जोश हाई

दरअसल हुआ कुछ यूं कि सुबह जब वो संसद के लिए निकल रहे थे. तभी फैजाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद उनसे मिलने पहुंच गए. वो अखिलेश की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. अखिलेश से मिलाने के लिए वो अपने साथ बीजेपी के एक नेता को समाजवादी पार्टी में लेने की जिद करने लगे. अखिलेश ने बहुत समझाया लेकिन अवधेश मानने को तैयार नहीं हुए. वो चाहते थे कि बीजेपी के नेता को अखिलेश टिकट देने की गारंटी दें. मगर अखिलेश दूसरे मूड में थे. न उन्होंने टिकट की गारंटी दी और न ही बीजेपी के नेता से मिलने को तैयार हुए. बीजेपी नेता दिल्ली में अखिलेश के घर के बाहर अपनी गाड़ी में बैठे रहे. अखिलेश ने तो समाजवादी पार्टी के उस नेता को दोबारा ऐसा काम न करने की नसीहत भी दे डाली. ये सच है कि लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद से ही समाजवादी पार्टी कैंप का जोश हाई है. पार्टी ने अब तक का सबसे बढ़िया प्रदर्शन करते हुए 37 सीटें जीती हैं. जबकि यूपी बीजेपी में घमासान मचा है. आपसी गुटबाज़ी चरम पर है. बीजेपी में एक नेता दूसरे का काम लगाने में जुटा है. ऐसे में बीजेपी के कुछ नेता अभी से समाजवादी साइकिल की सवारी के जुगाड़ में हैं.

 

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Author: The Hindi Post