इस बार संसद का मानसून सत्र 22 जुलाई को शुरू होने वाला है. जो कि 12 अगस्त तक चलेगा. इस बार के सत्र से सभी को काफी उम्मीदें हैं. दरअसल इस बार 23 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम बजट पेश करने वाली है. वहीं इस बार के सत्र के शुरू होने से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) का गठन कर दिया है. समिति के अध्यक्ष ओम बिरला बने हैं. कार्य सलाहकार समिति यानी बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में विभिन्न दलों के 14 सांसदों को सदस्यों के रुप में मनोनीत किया गया है. यह कमेटी लोकसभा के कामकाज के लिए काफी अहम होती है.
क्या है बिजनेस एडवाइजरी कमेटी का काम?
संसदीय समितियां सांसदों का एक पैनल है जो संसद के तरह-तरह के कामकाज में प्रभावी रूप से मदद करने के लिए सदन द्वारा नियुक्त या निर्वाचित किया जाता है. यह समिति स्पीकर (लोकसभा) या सभापति (राज्यसभा) के निर्देशन में काम करती है. बिजनेस एडवाइजरी कमेटी संसद की स्टैंडिंग कमेटी यानी स्थायी समिति है, जो एक निश्चित समय के अंतराल पर गठित की जाती है. बिजनेस एडवाइजरी कमेटी आमतौर पर हर सत्र की शुरुआत में बैठती है. सरकारी विधेयकों और अन्य कामकाज के लिए कितना समय आवंटित किया जाना चाहिए, इसका सुझाव या सिफारिश यह समिति करती है. यह केवल उन विधेयकों के समय पर विचार करती है, जिसे सभापति ने सदन के नेता से परामर्श के बाद समिति को भेजे हैं. समिति, अपनी पहल पर, सरकार को सदन में चर्चा के लिए विशेष विषयों को आगे लाने की सिफारिश भी कर सकती है. ऐसी चर्चाओं के लिए समय के आवंटन का काम बिजनेस एडवाइजरी कमेटी ही देखती है. समिति के पास ऐसे और भी काम होते हैं जो उसे समय-समय पर अध्यक्ष द्वारा सौंपे जा सकते हैं. कमेटी द्वारा लिए गए निर्णय हमेशा सर्वसम्मत होते हैं.
कार्य सलाहकार समिति में होते हैं सभापति समेत 15 सदस्य
लोकसभा की कार्य सलाहकार समिति में सभापति समेत 15 सदस्य होते हैं. अगर इनमें से कोई सदस्य समिति से हटता है, तो अध्यक्ष किसी नए सदस्य को मनोनीत कर सकते हैं. समिति में सदन के लगभग सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व होता है. जिन विपक्षी दलों को समिति में जगह नहीं मिल पाती उनके कुछ सदस्यों को अध्यक्ष द्वारा बैठकों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाता है. कार्य सलाहकार समिति का गठन पहली बार 14 जुलाई 1952 को किया गया था.
इस बार की कमेटी में कौन-कौन सदस्य शामिल?
इस बार की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में बीजेपी की ओर से सांसद निशिकांत दुबे, अनुराग सिंह ठाकुर, भर्तृहरि महताब, पीपी चौधरी, बिजयंत पांडा, डॉ. संजय जायसवाल आदि शामिल हैं. वहीं विपक्षी खेमे से कांग्रेस के सांसद के. सुरेश, गौरव गोगोई, टीएमसी के सुदीप बंदोपाध्याय, डीएमके के दयानिधि मारन, शिवसेना यूबीटी के अरविंद सावंत को सदस्य के तौर पर मनोनीत किया गया है. ओम बिरला की अध्यक्षता वाली कमेटी में सुदीप बंदोपाध्याय (तृणमूल कांग्रेस), पीपी चौधरी (बीजेपी), लवू श्रीकृष्ण देवरायलु (टीडीपी), निशिकांत दुबे (बीजेपी), गौरव गोगोई (कांग्रेस), संजय जायसवाल (बीजेपी), दिलेश्वर कामत (जेडीयू), भर्तृहरि महताब (बीजेपी), दयानिधि मारन (डीएमके), बैजयंत पांडा (बीजेपी), अरविंद सावंत (शिवसेना-यूबीटी), के. सुरेश (कांग्रेस), अनुराग ठाकुर (बीजेपी) और लालजी वर्मा (सपा) सदस्य भी शामिल हैं.