कौन है ऋषि सुनक को हराने वाले कीर, जिन्होंने वेश्यालय की छत पर बैठकर की थी पढ़ाई, आज पाया सबसे बड़ा मुकाम ?

ब्रिटेन के आम चुनावों में कीर स्टार्मर ने ऋषि सुनक को करारी मात दी. कीर स्टार्मर अब ब्रिटेन के 58वें प्रधानमंत्री बन गए हैं. ब्रिटिश जनता ने 14 सालों से सत्ता पर काबिज कंजरवेटिव पार्टी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है और लेबर पार्टी को भारी बहुमत के साथ कुर्सी सौंप दी है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की गद्दी पर बैठने वाले कीर स्टार्मर बेहद ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके जीवन का एक समय ऐसा भी था जब उन्होंने वेश्यालय की छत पर बैठ कर पढ़ाई की. आइए जानते हैं कीर स्टार्मर के जीवन के बारे में-

1962 में बेहद गरीब परिवार में हुआ कीर का जन्म

कीर स्टार्मर का जन्म 2 सितंबर, 1962 को लंदन के बाहरी इलाके में एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था. उनके पिता टूलमेकर थे और मां नर्स का काम करती थी. स्टार्मर के पिता रोडने स्टार्मर कट्टर वामपंथी थे. इसके चलते उन्होंने अपने बेटे का नाम लेबर पार्टी के संस्थापक कीर हार्डी के नाम पर कीर स्टार्मर रखा. कीर स्टार्मर का बचपन बेहद गरीबी में बीता. इसी कारण वे खुद को ‘वर्किंग क्लास बैकग्राउंड’ से बताते हैं. उन्होंने 11वीं तक की पढ़ाई रिगेट ग्रामर स्कूल से की. पढ़ाई में तेज होने के कारण उनकी फीस स्थानीय काउंसलर भरता था. ग्रामर स्कूल में पढ़ाई से लेकर खेलकूद और म्यूजिक तक में बेहतरीन होने के कारण उनके भाई-बहन उन्हें ग्रामर स्कूल का सुपरबॉय कहकर बुलाते थे। स्टार्मर ने अपने कई इंटरव्यू में कहा है कि उनकी पिता से नहीं बनती थी. बस मां जोसेफिन से भावनात्मक लगाव था, लेकिन वो भी एक दुर्लभ बीमारी की शिकार हो गईं. उनकी मां स्टिल्स नाम की ऑटोइम्यून बीमारी की शिकार थीं. ऑर्थराइटिस जैसी इस बीमारी के कारण मां के लिए खड़ा होना भी मुश्किल हो गया. इस कारण स्टार्मर का बचपन बेहद मुश्किल में बीता. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि मां 50 साल तक इस बीमारी से जूझी. आखिरी दिनों में उनकी हड्डियां हल्का सा दबाव पड़ते ही टूट जाती थी. दर्द से परेशानी के कारण उनके पैर काटने पड़े, मगर आखिरी सांस तक उनका दर्द नहीं गया.

लंदन में वेश्यालय की छत पर की पढ़ाई

पढ़ाई के दौरान ही महज 16 साल की उम्र में वे लेबर पार्टी के यूथ विंग ‘यंग सोशलिस्ट’ के साथ जुड़ गए. स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद 18 साल की उम्र में उन्होंने लीड्स यूनिवर्सिटी में लॉ की पढ़ाई के लिए एडमिशन लिया. इसके साथ ही वो अपने परिवार में यूनिवर्सिटी जाकर पढ़ने वाले पहले व्यक्ति बने. स्टार्मर मिडिल क्लास परिवार से थे. जब लीड्स यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए लंदन आए तो उनके पास ज्यादा पैसे नहीं थे. इसके चलते उन्हें वेश्यालय की छत पर बने कमरे में रहना पड़ा था. छोटा सा वह कमरा काफी गंदा था, आस-पास बहुत शोर होता था. हालांकि, इसका किराया कम होने के चलते स्टार्मर ने वहां रहना ठीक समझा. कीर स्टार्मर ने अपना करियर वकील के तौर पर शुरू किया था. खासतौर पर वह मानवाधिकारों से जुड़े मामले लड़ा करते थे. सरकारी अभियोजक बनने पर उन्होंने फोन-हैकिंग के घोटालों जैसे हाई प्रोफाइल मामले भी संभाले. इसके बाद वे राजनीति में आए और साल 2015 में 52 साल की उम्र में होलबोर्न और सेंट पैनक्रॉस से संसद सदस्य चुने गए. शुरू में उन्हें करिश्माई व्यक्तित्व वाला नहीं होने के लिए नकारा गया, लेकिन लोगों को उनकी स्थिर अप्रोच और मैनेजमेंट संबंधी दृष्टिकोण पसंद आया.

2021 के उपचुनाव में मिली हार के बाद छोड़ना चाहते थे राजनीति

स्टार्मर को सांसद बनने के दो साल बाद ही लेबर पार्टी ने ब्रेक्जिट स्पोक्सपर्सन का काम संभाल लिया. फिर उन्होंने लेबर पार्टी के चीफ जेरेमी कार्बिन के अंडर में ब्रेग्जिट सचिव के तौर पर भी काम किया. ब्रेग्जिट यूरोपियन यूनियन से ब्रिटेन को अलग करने की प्रक्रिया थी. साल 2019 में लेबर पार्टी को मिली चुनावी हार के बाद स्टार्मर ने पार्टी नेता के तौर पर जेरेमी कार्बिन को चुनौती दी और 2020 में लेबर पार्टी के चीफ चुने गए. कीर स्टार्मर ने 2020 में लेबर पार्टी के चीफ के तौर पर कामकाज संभालते हुए ही दोबारा सत्ता में आने का टारगेट तय किया था. इसके लिए उन्होंने लगातार काम किया. अंग्रेजी अखबार टेलीग्राफ मुताबिक स्टार्मर के दोस्त बताते हैं कि 2021 में हार्टलपूल के उपचुनाव में मिली हार के बाद कीर स्टार्मर राजनीति को अलविदा कहने वाले थे। वो इस चुनाव में हुई हार से बेहद दुखी थे। लेबर पार्टी के लिए सेफ सीट माने जानी वाली हार्टलपूल को कंजर्वेटिव के हाथों हारने के बाद स्टार्मर ने राजनीति छोड़ने को लेकर अपने दोस्तों से बात की थी। उन्होंने अपने दोस्तों को बताया था कि वो राजनीति छोड़कर किताबों की दुकान में काम करना चाहते थे।

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Author: The Hindi Post