संत कबीर दास जी का एक दोहा है- “ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोए, औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए” मतलब कि हमेशा ऐसी भाषा बोलनी चाहिए जो सामने वाले को सुनने में अच्छी लगे और उन्हें सुख की अनुभूति हो, साथ ही हमें खुद को भी आनंद का अनुभव हो. मगर आज की भागती दौड़ती जिंदगी में ऐसा देखने को कम ही मिलता है. आज कल तो एक शख्स की बात दूसरा शख्स बिना हो-हल्ला किए शांति से सुन ले वहीं बड़ी बात है. वहीं अगर हम ये उम्मीद नेताओं से लगाने लगें फिर तो हमारा भगवान ही मालिक है. एक समय था जब देश की विदेश मंत्री और स्वर्गीय सुषमा स्वराज जब सदन में बोलना शुरू करतीं थीं, तो ऐसा लगता था कि केवल उन्हें ही सदन में बोलने का अधिकार मिलना चाहिए. अगर सुषमा स्वराज कटाक्ष भी करतीं थीं तो विपक्ष निरुत्तर हो जाता था. उनकी भाषा शैली में ऐसा दम था. ऐसा ही कुछ एक बार फिर देखने को मिला जब राज्यसभा में लेखिका सुधा मूर्ति ने अपना पहला भाषण शुरू किया. जी हां जिस अदब, तमीज और सलीके से सुधा मूर्ति ने सदन में अपनी बात रखी. उसके बाद से सोशल मीडिया पर उनके भाषण की चर्चा जोरों पर है. यहां तक कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘मुद्दों’ के चुनाव को लेकर मूर्ति का धन्यवाद किया.
सर्वाइकल कैंसर को लेकर अभियान क्यों नहीं
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर उच्च सदन में हो रही चर्चा में हिस्सा लेते हुए सुधा मूर्ति ने कहा ‘कि महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इससे बचाव के लिए किशोरावस्था में इसके टीके लगाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। हमारी सामाजिक व्यवस्था ऐसी है जिसमें महिलाएं अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पातीं। जब वे अस्पताल पहुंचती हैं तो उनमें सर्वाइकल कैंसर तीसरे या चौथे स्टेज पर होता है। उन्हें बचाना मुश्किल हो जाता है।’ उन्होंने आगे बताया ‘कि उनके पिता कहते थे कि महिलाएं परिवार का केंद्र होती हैं और महिला के निधन के बाद पति को तो दूसरी पत्नी मिल जाती है लेकिन बच्चों को दूसरी मां नहीं मिलती। सुधा मूर्ति ने कहा कि कोविड काल में जब व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया गया तो महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए अभियान क्यों नहीं चलाया जा सकता। अगर सरकार हस्तक्षेप करे तो यह महंगा भी नहीं होगा। इससे बड़ी आबादी को लाभ होगा।’
धरोहर स्थलों के लिए जागरूकता फैलाई जानी चाहिए
इसके बाद सुधा मूर्ति ने पर्यटन का जिक्र करते हुए कहा कि लोग अक्सर अजंता, एलोरा, ताजमहल देखने जाते हैं। ”लेकिन भारत में 42 धरोहर स्थल हैं जिनका न तो अधिक प्रचार प्रसार किया गया है और न ही उनके बारे में लोगों को जानकारी है। यह हमारा देश है और हमें इसकी संस्कृति की जानकारी होनी चाहिए।’ सुधा मूर्ति ने कहा ‘दक्षिणी राज्यों में ही कई ऐसे स्थान हैं जिनका बेहद गौरवशाली इतिहास है। त्रिपुरा में उनाकोटी के बारे में कोई नहीं जानता जबकि यह स्थान 12,500 साल से भी अधिक पुराना है। कश्मीर का मुगल गार्डन धरोहर स्थल में शामिल नहीं है। इस ओर ध्यान देना चाहिए। गुजरात में लोथल और धौलावीरा, वाराणसी के पास सारनाथ, मध्य प्रदेश में मांडू का किला, कर्नाटक में श्रवण बेलगोला का मंदिर… ‘क्या नहीं है हमारे खूबसूरत देश में। हमें इसका अपेक्षित प्रचार प्रसार करना चाहिए, यहां सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए और इनके बारे में जागरुकता फैलाई जानी चाहिए।’
इंफोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ति की पत्नी हैं सुधा मूर्ति
लेखिका सुधा मूर्ति का जन्म उत्तरी कर्नाटक के शिगांव में 19 अगस्त 1950 को हुआ था. सुधा मूर्ति ने बीवीबी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, हुबली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया है. वह इंजीनियरिंग कॉलेज में 150 स्टूडेंट्स के बीच दाखिला पाने वाली पहली महिला थीं. सुधा मूर्ति इंफोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ति की पत्नी हैं. सुधा मूर्ति के दो बच्चे हैं, बेटी अक्षता मूर्ति और बेटा रोहन मूर्ति. अक्षता नारायण मूर्ति ब्रिटेन में रहने वाली भारतीय फैशन डिजाइनर हैं. अक्षता यूके के प्रधानमंत्री की पत्नी हैं. ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक सुधा मूर्ति के दामाद हैं. रोहन मूर्ति, मूर्ति क्लासिकल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया के साथ ही एक डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन स्टार्ट अप सोरोको के संस्थापक हैं.