इधर PM मोदी संसद में राष्ट्रपति अभिभाषण पर चर्चा कर रहे थे कि उधर हाथरस में एक ऐसा हादसा हो गया. जिसने सबको झकझोर कर रख दिया. शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक साथ 100 से ज्यादा लोगों की भगदड़ में मौत हो जाएगी, दरअसल ये भगदड़ हाथरस में एक सत्संग के दौरान मची. जिसमें करीबी 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग घायल बताए जा रहे है, इस आंकड़े से आप खुद अंदाजा लगा सकते है कि किस तरह की भीड़ उस सत्संग में उमड़ी होगी, इस हादसे ने एक नहीं, बल्कि सवाल शासन-प्रशासन पर भी खड़े कर दिए है. चश्मदीद लोगों की मानें तो मौके पर ऐसी चीख पुकार मची थी जिसके बारे में सपने में भी नहीं सोचा था. लाशों का तो ऐसा ढेर लगा की देखने वालों की भी रुंह कांप उठी. बता दें मरने वालों में ज्यादातर बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक हाथरस के फुलरई गांव में नारायण साकार हरि का सत्संग आयोजित किया गया था. सत्संग वाली जगह छोटी थी और भीड़ बहुत ज्यादा थी. भीड़ अनियंत्रित हो गई और भगदड़ मच गई. इस हादसे पर सत्ता पक्ष से लेकर विपक्षी खेमे के नेताओं ने दुख जताया है. यहां तक की खुद PM मोदी ने इस हादसे पर CM योगी से बात की है. जिसके बाद CM योगी ने हाथरस जाने का फैसला लिया है. वहीं अखिलेश यादव ने सरकार पर सवाल उठाए है.
‘भोले बाबा’ के प्रवचन सुनने उमड़े हजारों श्रद्धालु
बता दें हाथरस के मुगलगढ़ी इलाके स्थित फुलरई गांव में मानव मंगल मिलन समागम समिति ने नारायण साकार विश्व हरि के नाम से प्रसिद्ध ‘भोले बाबा’ का प्रवचन कार्यक्रम रखा था. इसमें तकरीबन 50 हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ जुटी थी. कार्यक्रम स्थल पर प्रशासन की परमिशन से ज्यादा अधिक लोग पहुंच गए थे. इसी बीच वहां भगदड़ मच गई, जिसमें 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. जबकि 200 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं. इनमें कई की हालत गंभीर है. मृतकों का आंकड़ा अभी बढ़ सकता है. बता दें यूपी के तमाम वरिष्ठ अधिकारी हाथरस पहुंचे हुए है. उनकी निगरानी में सब व्यवस्थाओं को देखा जा रहा है, यहां तक की खबरें ये भी आ रही है कि मौत के आंकड़ें 200 से ज्यादा है,. कुछ लोगों ने तो गिनती तक करके बताई है.
कौन हैं नारायण साकार हरि?
नारायण साकार हरि मूल रूप से उत्तर प्रदेश के एटा जिले के बहादुर नगरी गांव के रहने वाले हैं. उनकी शुरुआत पढ़ाई लिखाई यहीं हुई. उच्च शिक्षा के बाद गुप्तचर विभाग की नौकरी लग गई. काफी समय तक नौकरी करते रहे, फिर आध्यात्म की तरफ मुड़ गए. आध्यात्मिक जीवन में आने के बाद अपना नाम सूरजपाल से बदलकर नारायण साकार हरि रख लिया. पटियाली गांव में आश्रम बना लिया. नारायण साकार हरि और बाबाओं की तरह गेरुआ वस्त्र या कोई अलग पोशाक नहीं पहनते. वह अक्सर सफेद सूट, टाई और जूते में नजर आते हैं. कई बार कुर्ता-पाजामा पहने दिखते हैं. साकार हरि अपने समागम में खुद बताते हैं कि नौकरी के दिनों में उनका मन बार-बार आध्यात्म की तरफ भागता था. नौकरी के बीच उन्होंने निस्वार्थ भाव से भक्तों की सेवा का कार्य शुरू कर दिया. फिर इसी रास्ते पर चल पड़े. साकार हरि कहते हैं कि 1990 के दशक में उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और आध्यात्म में रम गए. प्रवचन देने लगे. वो बताते हैं कि उनके समागम में जो भी दान, दक्षिणा, चढावा वगैरह आता है, उसे अपने पास नहीं रखते बल्कि भक्तों में खर्च कर देते हैं.